करेंसी ट्रेड

पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है?

पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है?

Stock Market पेपर ट्रेडिंग क्या होता हैं ? पेपर ट्रेडिंग कैसे करते हैं ?

क्रिकेट के प्लेयर्स नेट प्रैक्टिस करते है। स्टॉक मार्केट ट्रेडर्स पेपर ट्रेडिंग करते हैं। समझ लिया, लेकिन थोड़ा ठहरो और पूरी बात को समझो। नेट प्रैक्टिस की तरह इसे भी लगातार करना होता हैं। पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए स्ट्रेटेजी बनानी हो तो और भी ज्यादा वक्त देना होता हैं।

आपको यह बात जानकर हैरानी होगी की, स्टॉक मार्केट में 80% ट्रेडर्स पेपर ट्रेडिंग नहीं करते हैं। बस 20 % ट्रेडर्स ही यह करते हैं। इनमे से ही आगे चलकर ट्रेडिंग में करियर करते हैं।

पेपर ट्रेडिंग क्या हैं ?

"पेपर ट्रेडिंग याने की पेपर पर ट्रेडिंग करना।" आसान हैं ? तो ठीक हैं। इतनी आसान बात को मुश्किल क्यों बनाना ?

इस बात पर ध्यान दें की, अपनी मेहनत की कमाई को स्टॉक मार्केट में निवेश करना जोखिम भरा काम हैं। और इससे भी ज्यादा जोखिम ट्रेडिंग में होती हैं। इसलिए नेट प्रैक्टिस तो बनती ही हैं। हैं ना ? इससे डर और लालच पर कंट्रोल करने में मदद मिलती हैं। फियर अँड ग्रीड के बारे में हम यहीं से दूसरे पेज पर जाकर पढ़ सकते हैं। और फिर यहाँ कंटीन्यू कर सकते हैं।

स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग में, क्रिकेट की ही तरहा, गया तो सिक्स वर्ना कैच आउट वाली सिच्युएशन की संभावना रहती हैं। इसे पहचानने के लिए और बचने के लिए हमें पेपर ट्रेडिंग करनी होती हैं। और हम यह भी कह सकते हैं की, ट्रेडिंग में प्रॉफिट का सिक्सर लगाने के लिए हमें इसे करना चाहिए।

उदाहरण

हमें SBI के शेयर्स खरीदने हो तो हम ब्रोकर के जरिए बायिंग का ऑर्डर डालेंगे। इससे हमारी पोजीशन बनेगी। कीमत बढ़ने पर सेल करते हैं तो मुनाफा होगा। और अगर कीमत निचे जाती हैं तो लॉस उठाना पड़ सकता हैं।

लेकिन पेपर ट्रेडिंग में हम कागज पर ट्रेड को लिखते हैं। और क्या रिसल्ट आया है इसका मुआयना करते हैं। ऐसा करने से शुरू में लॉस उठाना नहीं पड़ता और स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग से परिचय भी होता हैं। जैसे की एक कहावत हैं की, साँप भी मर जाए और लाठी भी ना टुंटे।

पेपर ट्रेडिंग की सामग्री और स्टेप्स

यहाँ पर हम सामग्री और प्रोसेस को समझ लेते हैं।

पेपर ट्रेडिंग की सामग्री

पेपर, पेन्सिल या पेन हो तो भी चलेगा। मोबाईल या लॅपटॉप जो अवेलेबल हैं और इंटरनेट कनेक्शन। बस इतने से काम चल जाएगा।

महत्वपूर्ण बात

पेपर ट्रेडिंग करने के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता नहीं होती है। यह अगले स्टेप में आता हैं। आइए पहले हम पेपर ट्रेडिंग के स्टेप्स समज़ते हैं।

पेपर ट्रेडिंग करने के पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? 8 पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? स्टेप्स

1 ) स्टॉक मार्केट की जानकारी लेना, टेक्निकल एनालिसिस करना। यह हम इन्वेस्टिंग की वेबसाइट पर कर सकते हैं।

2 ) बायिंग, सेलिंग और स्टॉप लॉस ऑर्डर्स को समज़ना।

3 ) ट्रेडिंग के लिए स्टॉक्स, इंडेक्स, इत्यादि का चुनाव करना। इनकी लिस्ट बनाना।

4 ) अपने चुने हुए स्टॉक्स को चार्ट एनालिसिस के जरिए ट्रैक करना।

5 ) अपनी जानकारी के आधार पर ट्रेड तय करके कागज पर लिखना।

6 ) ट्रेड के लिए टार्गेट और स्टॉप लॉस लिख पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? लेना।

7 ) टार्गेट हिट होने पर हमने क्या सही किया इसका स्टडी करना हैं। और स्टॉप लॉस हिट होने पर हमसे क्या गलती हुई इसका स्टडी करना हैं। इसे संक्षिप्त में लिख लेना हैं।

8 ) इस अनुभव का उपयोग अगले ट्रेड में परफॉर्मेंस सुधारने के लिए करना हैं।

इन 8 स्टेप्स को फॉलो करते हुए पेपर ट्रेडिंग करके हम Nifty 200 के साथ Intraday Trading करने में माहिर बन सकते हैं। यह इंट्राडे ट्रेडिंग करने की अच्छी ट्रिक हैं।

पेपर ट्रेडिंग कैसे करते हैं ?

जवाब में कहते हैं कि, नए ट्रेडर्स को बेसिक पेपर ट्रेडिंग करनी चाहिए। और जो ऑलरेडी ट्रेडर्स हैं, ट्रेडिंग करते हैं उनको एडव्हान्स लेवल के साथ पेपर ट्रेडिंग करनी चाहिए। स्टॉक मार्केट चर्निंग करने के लिए भी पेपर ट्रेडिंग उपयुक्त साबित होता हैं।

A ) पेपर ट्रेडिंग नए ट्रेडर्स के लिए

अगर हम नए ट्रेडर हैं। और शुरुआत करने जा रहे हैं तो, ऊपर दिए गए 8 स्टेप्स को इस तरह से फॉलो करना है।

1 ) स्टॉक मार्केट की जानकारी लेना। इसमें हम स्टॉक मार्केट में कौन-कौनसे शेयर्स हैं यह देखकर उनमे से कुछ शेयर्स की लिस्ट बनाएँगे। और उनकी प्राइस कितनी है यह जानकारी लेंगे।

2 ) टेक्निकल एनालिसिस करना। इसमें हम सिर्फ शेयर के प्राइस चार्ट को लेते हैं। चार्ट पर सपोर्ट, रेजिस्टेंस और ट्रेंड लाइन को सेट करते हैं। शुरुआत में इतना काफी है।

3 ) अब हम चार्ट के सेट अप के अनुसार बन रहे ट्रेड्स को कागज पर लिखेंगे। और रिजल्ट का स्टडी करेंगे।

B ) पेपर ट्रेडिंग अनुभवी ट्रेडर्स के लिए

अगर हम अनुभवी ट्रेडर हैं। और प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो, ऊपर दिए गए 8 स्टेप्स को इस तरह से फॉलो करना है।

1 ) स्टॉक मार्केट की जानकारी लेना। इसमें हम स्टॉक मार्केट की खबरें पढ़ेंगे। महवपूर्ण इंडेक्स की दिशा को समझेंगे। इस दिशा को फॉलो करने वाले शेयर्स की लिस्ट बनाएँगे। और उनकी प्राइस कितनी है यह जानकारी लेंगे।

2 ) टेक्निकल एनालिसिस करना। इसमें हम शेयर्स के प्राइस के चार्ट के साथ इंडेक्स के चार्ट को भी देखते हैं। चार्ट पर सपोर्ट, रेजिस्टेंस और ट्रेंड लाइन को सेट करते हैं। इसके साथ स्टॉक मार्केट के महत्वपूर्ण इंडीकेटर्स का इस्तेमाल करते हैं।

3 ) लाइव डाटा जैसे की पुट कॉल रेश्यो, शेयर्स के ट्रेडिंग वॉल्यूम, टोटल बायर्स सेलर्स इस जानकारी को समझेंगे।

4 ) अब हम चार्ट के सेट अप के अनुसार बन रहे ट्रेड्स को कागज पर लिखेंगे। और रिजल्ट का स्टडी करेंगे।

पेपर ट्रेडिंग की खासियतें

पेपर ट्रेडिंग हमारे ट्रेडिंग स्टाइल पर निर्भर हैं। इसपर मेरे ट्रेडिंग करने वाले, ज्यादातर भाई और बहनें कहेंगे की हमारी तो कोई स्टाइल हैं ही नहीं। उनके लिए खुशखबरी यह हैं की, पेपर ट्रेडिंग करो आपकी ट्रेडिंग स्टाइल अपने-आप बनती जाएंगी। जिसे की ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी भी कहते हैं।

" जिनके पास ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी होती हैं वह सुधार के लिए बैक टेस्टिंग करते हैं। और जिनके पास यह नहीं होती वो पेपर ट्रेडिंग करके अपने लिए ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी बना सकते हैं।"

रियल ट्रेडिंग करते वक्त, हम रियल मनी ट्रेडिंग अकाउंट में डालते हैं। और इसके जरिए ट्रेडिंग करते हैं। अगर हम नए हैं और हमें लॉस होता हैं तो यह हमारे लिए इमोशनल प्रॉब्लम बन सकता है। Stock Market % Game में फँसकर, स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग के बारे में हमारा नजरिया निगेटिव हो सकता है। लेकिन पेपर ट्रेडिंग करने से हमें चार्ट को समझकर, प्राइस मूवमेंट को समझकर ट्रेडिंग करने की आदत हो जाती है।

उपयुक्त जानकारी

पेपर ट्रेडिंग के बारे में हमने यह जाना

स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग यह रिस्की बिजनेस है। इसमें डिसिप्लिन के सिवा पैसा कमाना मुश्किल होता है और डिसिप्लिन बनाने के लिए हमें कीमत चुकानी होती है।

यह कीमत हम, स्टॉक मार्केट रियल ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे डालकर लॉस करके चुका सकते हैं या फिर पेपर ट्रेडिंग करके पेपर पर लॉस करके भी चुका सकते हैं। इससे हमारे रियल मनी का नुकसान नहीं होगा। और स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग के करियर में हम फिट हो सकते हैं या नहीं यह हमें पैसे गवाएं बिना पता चलता है।

पेपर ट्रेडिंग के रिजल्ट को ध्यान में रखते हुए हम तय कर सकते हैं कि, हमें स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग करना है या नहीं करना है। और हाँ तो अपनी आगे की दिशा तय कर सकते हैं।

पोजिशनल ट्रेडिंग क्या होता है? Positional Trading Kya Hota Hai

शेयर बाजार में एक महीने से ज्यादा और एक साल के अंदर किया जाने बाला ट्रेडिंग को पोजिशनल ट्रेडिंग कहते पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? है। शेयर बाजार में समय के आधार पर 3 तहर के ट्रेडिंग होते जैसे इंट्राडे ट्रेडिंग ( 1 दिन के अंदर) , स्विंग ट्रेडिंग ( < 1 महीना ) और पोजिशनल ट्रेडिंग ( > 1 महीना ) । आप पोजिशनल ट्रेडिंग कैश में शेयर की डिलीवरी ले कर कर सकते है अथवा आप डेरिवेटिव्स में फ्यूचर और ऑप्शन कॉन्ट्रक्ट ख़रीद कर कर सकते है।आपको अच्छे से फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग के बारे में जानने केलिए नीच दिए गए लेक को पढ़े।

पोजिशनल ट्रेडिंग क्या होता है?

इक्विटी बाजार में ट्रेडिंग 2 सेगमेंट होते है

1) कैश ट्रेडिंग

इस प्रकार के ट्रेडिंग में आप मॉर्निज के बिना आपके खुदके पैसों ट्रेडिंग कर सकते है। इसमें आप शेयर की दिलीविरी लेकर खरीद और बिक्री कर ट्रेडिंग करते है। इसमें आपको बहोत कम रिटर्न्स मिलता है। मगर इसमें आर्थिक जोखिम भी बहोत कम होता है। शेयर बाजार में पेशे आदर ट्रेडर इस तरह के ट्रेडिंग नहीं करते है । पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? इसमें लेवल लघु समय ( < 1 वर्ष ) के निवेशक ट्रेडिंग करते है।

2) डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग

इस प्रकार के ट्रेडिंग में आप ब्रोकर मॉर्निज पैसों के साथ आपके ट्रेडिंग कर सकते है। इसमें आप स्टॉक ( ITC , HDFC , Reliance ) , करेंसी ( USD/INR ) , इंडेक्स ( NIFTY 50 / SENSEX ) और कमोडिटी ( Cruid Oil , Gold , Silver ) की दिलीविरी लिए बिना खरीद और बिक्री कर ट्रेडिंग करते है। इसमें आपको बहोत ज्यादा रिटर्न्स मिलता है। मगर इसमें आर्थिक जोखिम बहोत ज्यादा होता है। शेयर बाजार में पेशेदार ट्रेडर इस तरह के ट्रेडिंग करते है ।

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 2 तरह के होते है

a) फ्यूचर ट्रेडिंग

शेयर मार्किट में फ्यूचर ट्रेडिंग या फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ट्रेडिंग का मतलब होता हे की आप किसी भी स्टॉक / इंडेक्स को उसकी एक्सपाइरी डेट से पहले खरीद या बेच सकते हे, कोई भी फिक्स प्राइस पर।

b) ऑप्शन ट्रेडिंग

शेयर बाजार मेंहर दिन शेयर और इंडेक्स की मूल्य ऊपर नीचे होते रहता है । इस में अगर आप किसी शेयर को भबिष्य के किसी निधारित मूल्य (strick price) में बेचना और ख़रीदना हो तो आपको किसी के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट करना होता है । इस को आसान भासा में स्टॉक हेजिंग कहे ते है इस के निबेश की रिस्क कम होजा ता है । सभी कॉन्ट्रैक्ट का एक निधारित समय सीमा होता है । इसी कॉन्ट्रैक्ट (Option) को बेचना और खरीदना को option trading कहते है ।

ट्रेडिंग करने केलिए सबसे अच्छी ट्रेडिंग कंपनी कौन सी है?

बाजार में बहोत सारे ऐप है जो कि ऑप्शन ट्रेडिंग देते है मगर सबमें अलग ब्रोकेज चार्ज और मार्जिन के नियम अलग अलग है । इस लिए आपको बहोत सावधानी से अपना ब्रोकर चुने । में आपको कुछ ब्रोकर की सलाह देसकता है ।

1. जेरोधा सेकुरिट्स
2. ऐंजल ब्रोकिंग
3. मोतीलाल ओसबल सेकुरिट्स
4. IIFL सेकुरिट्स
5. उप स्टॉक

इंट्राडे और पोजिशनल ट्रेडिंग में तुलना: आपको कौन सा पसंद करना चाहिए?

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स्टॉक मार्किट में निवेश सबसे अधिक मांग वाले कौशल में से एक है, यही कारण है कि लाखों लोग हर दिन सार्वजनिक एक्सचेंजों पर ट्रेड और पैसा लगाते हैं। एक ट्रेडर के रूप में शुरू करते समय दो तरीके होते हैं जिनमें कोई ट्रेड कर सकता है: पोजिशनल या इंट्राडे ट्रेडर के रूप में। आप या तो ट्रेड कर सकते हैं (इंट्राडे) या आप लंबी अवधि (पोजिशनल ट्रेडिंग) में इनसे अपना मुनाफा निकालने के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार कर सकते हैं। इन दोनों रणनीतियों का आमतौर पर अभ्यास किया जाता है व्यापारियों के बीच इंट्राडे ट्रेडिंग को अधिक पसंद किया जाता है।

यदि आप मुख्य रूप से थोड़े ही समय के लिए लाभ चाहते हैं, तो कोशिश करने के लायक ट्रेडिंग का एक रूप इंट्राडे ट्रेडिंग है। वास्तव में, इस प्रकार के व्यापार में एक ही व्यापारिक दिन के भीतर स्टॉक के साथ-साथ अन्य वित्तीय साधनों की खरीद और बिक्री शामिल है। इसलिए, इंट्राडे ट्रेडिंग का उद्देश्य छोटे बाजार की गतिविधियों पर कब्जा करना है। हालांकि, एक और तरीका है जिससे कोई शेयर बाजार के माध्यम से लाभ कमा सकता हैं: पोजिशनल ट्रेडिंग। पोजिशनल ट्रेडिंग को इंट्राडे ट्रेडिंग और लंबी अवधि के निवेश के बीच में रखा जा सकता है।

पोजिशनल ट्रेडिंग में ओवरनाइट पोजीशन शामिल होती है जो जोखिम प्रबंधन, ट्रेडिंग के चुने हुए दृष्टिकोण और ब्याज समय सीमा पर आधारित होती है। पोजिशनल ट्रेडों में एक समय सीमा के लिए शेयरों को शामिल रखना होता है जो 1-2 दिनों से लेकर महीनों तक हो सकता है ताकि कोई मुनाफा कमा सके। यह पूरी तरह से आप पर निर्भर करताहै जब आप एक ट्रेडर के रूप में अपनी स्थिति से बाहर निकलना चाहते हैं। बाजार ज्यादातर एक जैसे नही होते और और इस प्रकार कुछ ट्रेडर्स के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए वे पोजिशनल ट्रेडिंग चुनते है क्योंकि यह एक लंबी पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? समय सीमा प्रदान करता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग और पोजिशनल ट्रेडिंग में तुलना

इंट्राडे ट्रेडिंग और पोजीशनल ट्रेडिंग: दोनों शैलियों पर एक विस्तृत नज़र डालकर, आप यह चुन सकते हैं कि आपकी आवश्यकताओं के लिए कौन सी शैली उपयुक्त ट्रेडिंग रणनीति है।

इंट्राडे ट्रेडिंग

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, इंट्राडे ट्रेडिंग मेंबाजार खुलने के बाद नई पोजीशन लेना और बाजार बंद होने से पहले उसी दिन उन पोजीशन को बंद करना शामिल है। एक इंट्राडे ट्रेडर के रूप में, आप ट्रेडिंग के दिन के अंत तक अपनी स्थिति को बंद कर सकते हैं, चाहे वह लाभ या हानि में बंद हो रहा हो। इसलिए, इंट्राडे ट्रेडिंग का उद्देश्य छोटे बाजार की गतिविधियों से लाभ कमाना है।

चूंकि ट्रेडर उच्च लीवरेज और बहुत कम एक्सपोजर के साथ लेट पोजीशन में ट्रेड कर सकते हैं, इंट्राडे ट्रेडिंग व्यापक रूप से प्रचलित है। लीवरेज आधारित व्यापार के मामले में, आपको बाजार बंद होने से पंद्रह से तीस मिनट पहले अपनी स्थिति से बाहर निकलना होगा। यदि कोई अपनी स्थिति से बाहर नहीं निकल पाता है, तो ब्रोकर खुद ही सभी पदों को बंद कर देगा। जब आप अपने इंट्राडे की स्थिति को डिलीवरी में बदलना चाहते हैं, तो आपको अपने ब्रोकरेज को पूरी राशि का भुगतान करना होगा। इन प्रक्रियाओं को बाजार बंद होने से पहले पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? पूरा किया जाना चाहिए।

चूंकि यह आवश्यक है कि आप पूरे अनुभव सत्र में सक्रिय हैं, इंट्राडे ट्रेडिंग केवल पूर्णकालिक ट्रेडर्स के लिए उपयुक्त है। बाजार बिल्कुल भी एकसमान नही हैं, इसलिए यदि आप अपने लक्ष्य से चुक गये, तो आपका पोर्टफोलियो खराब हो सकता है। व्यापारियों को इंट्राडे का सबसे ज्यादा लाभ उच्च लीवरेज पर कारोबार कर रहा है।उच्च लाभ उठाने या मार्जिन ट्रेडिंग बड़ी जीत के लाभों के साथ आती है लेकिन यह बड़े नुकसान की क्षमता के साथ भी आती है।

पोजिशनल ट्रेडिंग

हाल के वर्षों में, पोजीशनल रूप से ट्रेडिंग ने बहुत लोकप्रियता हासिल की है क्योंकि यह इंट्राडे ट्रेडिंग के सबसे बड़े जोखिमों में से एक को समाप्त करता है:: किसी के ट्रेडिंग सत्र के अंत तक किसी की स्थिति को स्क्वायर ऑफ करना ट्रेडिंग पोजीशनल रूप से एक या अधिक दिनों, हफ्तों या महीनों के लिए किसी की आवश्यकता के अनुसार अपनी स्थिति को बनाए रखने की अनुमति देता है। पोजीशनल ट्रेडिंग के साथ, किसी के समय सीमा को तय नहीं किया जाएगा, बल्कि, इसे किसी के ट्रेड की प्रकृति के आधार पर चुना जा सकता है।

स्थिति धारण करने में छुट के कारण, पोजीशनल ट्रेडिंग के लिए एक उच्च कार्यशील पूंजी की आवश्यकता है, लेकिन अधिक जोखिम लेने की क्षमता के साथ आता है। । जो आपका ब्रोकर कौन है, इस पर निर्भर करते हुए, आपको भविष्य के अनुबंधों को रातोंरात ले जाने के लिए मार्जिन के रूप में अपनी पूंजी का 50% या अधिक की आवश्यकता हो सकती है। पोजीशनल ट्रेडिंग की उच्च श्रेणी से स्टॉप-लॉस जोखिम अधिक हो सकता है। उदाहरण के लिए, आप निफ्टी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के अपने इंट्राडे ट्रेड के लिए पंद्रह से बीस अंकों के स्टॉप-लॉस का उपयोग कर सकते हैं। । एक पोजीशनल ट्रेडिंग के लिए जो दीर्घकालिक है, हालांकि, आपको स्टॉप लॉस का उपयोग करना होगा जो लगभग चालीस से 150 अंक तक है।

आपके पास इंट्राडे ट्रेडिंग के साथ एक सप्ताह के भीतर 20 से अधिक ट्रेड हो सकते हैं। पोजीशनल ट्रेडिंग के साथ, आपके पास केवल दो से पांच अल्पकालिक पोजीशनल ट्रेड होंगे। तो मूल रूप से, आपके पास इंट्राडे के साथ एक सप्ताह में 20 से अधिक ट्रेड हो सकते हैं, लेकिन पोजीशनल ट्रेडिंग के साथ, आपके पास केवल 2-5 अल्पावधि पोजीशनल ट्रेड होंगे। किसी के स्टॉप लॉस के आधार पर, यह स्पष्ट है कि पोजिशनल ट्रेडिंग के साथ जोखिम सहन करने के क्षमता समान या उससे भी कम हो सकती है।

जब आप कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक अपनी स्थिति पर ही रहना चुनते हैं, तो इसे दीर्घकालिक पोजीशनल ट्रेडिंग के रूप में जाना जाता है। बड़े ट्रेडिंग रेंज के परिणामस्वरूप, यहां स्टॉप लॉस के जोखिम के स्तर 200 अंक तक पहुंच सकता हैं, जबकि साथ ही, किसी के पुरस्कार 1000 अंक या उससे भी अधिक हो जाएंगे।, वास्तव में यह कहा जाता है कि किसी को पहले इंट्राडे ट्रेडिंग के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म पोजिशनल ट्रेडिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले शॉर्ट-टर्म पोजिशनल ट्रेडिंग करनी चाहिए।

आप के लिए किस प्रकार का व्यापार सबसे अच्छा है निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है। यदि आपके पास कम पूंजीकी क्षमता है, तो इंट्राडे ट्रेडिंग चुनना एक बेहतर कदम है क्योंकि पोजीशनल ट्रेडिंग के लिए उच्च पूंजी की आवश्यकता होती है। विचार करने का एक और पहलू यह है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। इंट्राडे एक उच्च जोखिम वाला व्यापार है। यदि आप अधिक मात्रा में जोखिम स्वीकार कर सकते हैं, तो स्थितिगत व्यापार की तुलना में इंट्राडे पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? ट्रेडिंग आपके लिए अधिक उपयुक्त हो सकती है, जिनमें से बाद में मध्यम से उच्च जोखिम शामिल हैं।एक अंतिम पैरामीटर आपका समय सीमा है। एक पूर्णकालिक व्यापारी जो अपनी स्क्रीन पर चिपके रहना चाहता है, इंट्राडे ट्रेडिंग बेहतर है, जबकि कोई व्यक्ति जो साइड में ट्रेडिंग करना चाहता है या अपना पूरा दिन नही दे सकता, वह,पोजीशनल ट्रेडिंग चुन सकता है।

शेयर बाजार में चाहते हैं पैसा कमाना तो इन 5 पसंदीदा ट्रेडिंग रणनीतियों के बारे में आपको होगा जानना

शेयर बाजार में ट्रेडिंग की कई रणनीतियां हैं लेकिन यहां पर हम सबसे ज्यादा लोकप्रिय रणनीतियों के बारे में चर्चा कर रहे हैं

ट्रेडर्स चाहें तो हर पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत को समझकर ट्रेडिंग में रणनीतियों के संयोजन का उपयोग भी कर सकते हैं

ट्रेडिंग का मतलब सिक्टोरिटीज को खरीदना और बेचना होता है। ट्रेडिंग भी कई प्रकार की होती हैं। एक दिन से लेकर सालों के लंबे अंतराल के लिए भी ट्रेडिंग की जाती है। इसके साथ ही अलग-अलग बाजारों के माहौल और वहां मौजूद जोखिम से जुड़ी विभिन्न ट्रेडिंग रणनीतियां (trading पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? strategies) शेयरों में कारोबार करने के समय अपनाई जाती हैं।

यहां पर हम कुछ ट्रेडिंग रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं जो बाकी रणनीतियों में से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ये रणनीतियां निवेशकों को तर्कसंगत निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading)

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इंट्राडे ट्रेडिंग जिसे डे ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। ये ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें निवेशक एक ही दिन में शेयरों को खरीदते और बेचते हैं। वे शेयर बाजार के बंद होने के समय से पहले ट्रेडिंग बंद कर देते हैं। एक ही दिन में वे मुनाफा और घाटा बुक करते हैं।

निवेशक इन शेयरों में एक दिन में कुछ सेकंड, घंटे के लिए या इसमें दिन भर में कई बार ट्रेड ले सकते हैं। इसलिए इंट्राडे एक अत्यधिक वोलाटाइल ट्रेडिंग रणनीति मानी जाती और इसके लिए तेजी से निर्णय लेना होता है।

पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading)

पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां शेयर्स को महीनों या सालों के लंबे समय तक रखा जाता है। ऐसे शेयरों में समय के साथ भाव में बड़ी बढ़त की अपेक्षा के साथ मुनाफा कमाने की उम्मीद की जाती है। निवेशक आमतौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ कंपनी का टेक्निकल ग्राउंड देखकर इस शैली को अपनाते हैं।

इसलिए इस प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति में आमतौर पर बाजार के रुझान और उतार-चढ़ाव जैसी अल्पकालिक जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading)

स्विंग ट्रेडिंग आमतौर पर एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक शेयरों के भाव में और तेजी की उम्मीद में एक दिन से अधिक समय तक शेयरों को अपने पास रखते हैं। स्विंग ट्रेडर्स आने वाले दिनों में बाजार की गतिविधियों और रुझानों की भविष्यवाणी करने के लिए जाने जाते हैं।

इंट्राडे ट्रेडर्स और स्विंग ट्रेडर्स के बीच स्टॉक को अपने पास रखने की समय सीमा में महत्वपूर्ण अंतर होता है। इसलिए कहा जाता है कि ज्यादातर टेक्निकल ट्रेडर्स स्विंग ट्रेडिंग की कैटेगरी में आते हैं।

टेक्निकल ट्रे़डिंग (Technical Trading)

टेक्निकल ट्रेडिंग में ऐसे निवेशक शामिल हैं जो शेयर बाजार में प्राइस चेंज की भविष्यवाणी करने के लिए अपने तकनीकी विश्लेषण ज्ञान का उपयोग करते हैं। इस ट्रेडिंग शैली में कोई विशेष समय-सीमा नहीं होती है क्योंकि यह एक दिन से लेकर महीनों तक के लिए भी हो सकती है।

बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए अधिकांश ट्रेडर्स अपने टेक्निकल एनालिसिस स्किल्स का उपयोग करते हैं। हालांकि स्टॉक की कीमतों का निर्धारण करते समय सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल एनालिसिस बाजार की परिस्थिति होती है।

फंडामेंटल ट्रेडिंग (Fundamental Trading)

फंडामेंटल ट्रेडिंग का मतलब स्टॉक में निवेश करना होता है पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है? जहां ट्रेडर्स समय के साथ भाव में तेजी की उम्मीद के साथ कंपनी के स्टॉक को खरीदता है। इस तरह की ट्रेडिंग में 'बाय एंड होल्ड' रणनीति में विश्वास किया जाता है।

इस प्रकार की ट्रेडिंग आमतौर पर कंपनी के फोकस्ड इंवेंट्स में किया जाता है। इसके लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, नतीजों, ग्रोध और मैनेजमेंट क्वालिटी का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाता है।

मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रेडिंग रणनीतियाँ बहुत काम की होती हैं और निवेशक को उस ट्रेडिंग शैली पर निर्णय लेने में मदद करती हैं जिसे वे अपनाना चाहते हैं। प्रत्येक प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत की गहन समझ के साथ ट्रेडर्स चाहें तो रणनीतियों के संयोजन का उपयोग करके भी शेयरों में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

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