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आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं

आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं
नवभारत टाइम्स 11 घंटे पहले

मुद्रा का प्रसार एवं मापन

मुद्रा का प्रसार एवं मापन :- किसी भी समय अर्थव्यवस्था में कुल मुद्रा को मापने के लिए केन्द्रीय बैंक कुछ मापक का प्रयोग करते हैं। भारत के संदर्भ में रिजर्व बैंक द्वारा 1977 में एक वर्क फोर्स का गठन किया गया, जिसके द्वारा बाजार में किसी समय पर कितनी मुद्रा उपलब्ध है, मापने के लिए 4 मापक तय किये गए जिन्हें M1, M2, M3 एवं M4 नाम से जाना जाता है। मुद्रा के मापन को समझने से पहले अर्थव्यवस्था में तरलता शब्द को समझना आवश्यक है।

अर्थव्यवस्था में तरलता (Liquidity) – अर्थव्यवस्था में तरलता दो प्रकार से हो सकती है –

1. बाजार की तरलता – किसी भी समय अर्थव्यवस्था में उपलब्ध मुद्रा की कुल मात्रा को तरलता कहा जाता है। यदि तरलता अधिक है तो मुद्रास्फीति की स्थित उत्पन्न हो सकती हैं जबकि तरलता कम होने की स्थिति में अपस्फीति या मंदी आ सकती है।

2. मुद्रा की तरलता – मुद्रा की तरलता से संदर्भ मुद्रा के व्यय होने में लगने वाले समय से है। यदि समय कम लग रहा है तो वह मुद्रा अधिक तरल है। उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति के पास नगद, क्रेडिट कार्ड एवं सोने के रूप में परिसंपत्तियां (मुद्रा) उपलब्ध हैं तो नगद सबसे अधिक तरल (क्योंकि नगद सबसे जल्दी और आसानी से खर्ची जा सकती है), क्रेडिट आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं कार्ड कुछ कम तरल और सोने की तरलता सबसे कम मानी जाएगी।

मुद्रा का मापन

1. M1= CU (Coins and Currency) + DD (Demand and Deposit)

CU अर्थात लोगों के पास उपलब्ध नगद (नोट एवं सिक्के), DD अर्थात व्यावसायिक बैंकों के पास कुल निवल जमा एवं रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाये। निवल शब्द से बैंक के द्वारा रखी गयी लोगों की जमा का ही बोध होता है और इसलिए यह मुद्रा की पूर्ति में शामिल हैं। अंतर बैंक जमा, जो एक व्यावसायिक बैंक दूसरे व्यावसायिक बैंक में रखते हैं, को मुद्रा की पूर्ति के भाग के रूप में नहीं जाना जाता है।

2. M2= M1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमांए

3. M3= M1 + बैंक की सावधि जमाये(FD)

4. M4= M3 + डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमा राशि (राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्रों को छोड़कर)

M1 से M4 की तरफ जाने पर मुद्रा की तरलता घटती है, परन्तु बाजार की तरलता बढ़ती जाती है।

M1>M2>M3>M4

संकुचित मुद्रा (Narrow Money)= M1 को संकुचित मुद्रा भी कहते है क्योंकि मात्रा में ये अन्य सभी से सबसे कम होती है, अर्थात इसमें पैसा सबसे कम होता है।

वृहद/बड़ी मुद्रा (Broad Money)= M3 आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं को वृहद मुद्रा कहते है। सामान्यतः वृहद मुद्रा M4 को होना चाहिए परन्तु M1 से M4 तक जाते जाते उसे प्रयोग करना कठिन हो जाता है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि उसकी (M4) की तरलता इतनी कम है कि उसे प्रयोग नहीं किया जा सकता अतः M3 को ही वृहद मुद्रा कहा जाता है।

मुद्रा के प्रकार- मुद्रा को कई आधारों पर कई वर्गों में बाँटा जा सकता है। यहां पर हम मुद्रा की भौतिक स्थिति एवं मांग के आधार पर मुद्रा का वर्गीकरण बता रहें हैं-

  1. धात्विक – इसमें सभी सिक्के आते हैं।
  2. कागजी – सभी नोट आते हैं।
  3. प्लास्टिक – क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड आते हैं।
  4. बुरी मुद्रा – इसमें सभी कटे फटे नोट आते हैं।
  5. अच्छी मुद्रा – इसके अंतर्गत नये नोट आते हैं।
    अच्छी और बुरी मुद्रा के सम्बन्ध में अर्थशास्त्री ग्रेसम्स ने एक नियम बताया था। जिसे ग्रेसम्स के नियम के नाम से जाना जाता है।
    ग्रेसम्स का नियम- किसी भी अर्थव्यवस्था में बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर निकाल देती है तथा उसका स्थान ले लेती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति के पास पुरानी कटी-फटी मुद्रा (बुरी आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं मुद्रा) है तो वह उसे ही पहले प्रयोग में लाने का प्रयास करेगा न की नई मुद्रा (अच्छी मुद्रा) को, इस प्रकार बुरी मुद्रा, अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है।
  6. गर्म मुद्रा – जिस मुद्रा की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग अधिक हो उसे गर्म मुद्रा कहा जाता है। उदाहरण के लिए डॉलर।
  7. ठण्डी मुद्रा – जिस मुद्रा की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग कम हो उसे ठण्डी मुद्रा कहा जाता है।

विदेशी मुद्रा

हर देश की मुद्रा का अलग मूल्य होता है जोकि उस देश के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उसके उत्पादन हिस्से के आधार पर तय होता है। सामान्य भाषा में जब किसी देश की मुद्रा का हिस्सा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अधिक होगा तो उसका मूल्य भी अधिक होगा जैसे अमेरिका जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 20% हिस्सेदारी है, जबकि भारत की कुल 2% है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा का मूल्य निर्धारण

1. बाजार द्वारा मुद्रा का मूल्य निर्धारण – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में किसी देश की मुद्रा की मांग के आधार पर उसके मूल्य का निर्धारण किया जाता है। इसे प्रवाही विनिमय दर(Floating exchange rate) कहते हैं। प्रवाही इसलिए क्योंकि यह दर कम ज्यादा होते रहती है। किसी भी देश की मुद्रा का मूल्य निरपेक्ष(अकेले) नहीं होता वो हमेशा दूसरी मुद्रा के सापेक्ष होता है, अर्थात एक देश की मुद्रा की दूसरे देश के मुद्रा के साथ तुलना की जाती है इसे विनिमय दर(Exchange rate) कहते हैं। जैसे 1$=74रू0

2. सरकार द्वारा मुद्रा का मूल्य निर्धारण – कभी-कभी सरकारें भी जानबूझकर अपने देश की मुद्रा का मूल्य कम या ज्यादा कर देती है। ऐसा उस देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है –

आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं

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बिज़नेस न्यूज डेस्क - कई बार हम हमेशा रुपये की तुलना डॉलर से करते हैं। हाल ही में डॉलर के मुकाबले रुपया बेहद कमजोर स्तर पर आ गया है। 1 डॉलर की कीमत फिलहाल 81 रुपये के आसपास है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी करेंसी कौन सी है? अमेरिकी डॉलर की मुद्रा इस मुद्रा के मुकाबले कहीं नहीं है। एक समय में यह करेंसी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा छापी जाती थी। क्या आप इस मुद्रा के बारे में जानते हैं? कुवैत की करेंसी को दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी माना जाता है। इस मुद्रा को कुवैती दिनार के नाम आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं से जाना जाता है। 3 अक्टूबर 2022 को, 1 दिनार की कीमत लगभग रु 263.01 के बराबर आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं है। यानी अगर आप 263.41 रुपये खर्च करते हैं तो आपको 1 दीनार मिल सकता है। वहीं अगर भारतीय रुपये की तुलना डॉलर से करें तो 1 डॉलर की कीमत 81.52 रुपये आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं होती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि कुवैत में करीब 70-80 साल पहले जो करेंसी जारी की गई थी। यह केवल भारत सरकार द्वारा जारी किया गया था। यानी आरबीआई किसी समय कुवैत की करेंसी बनाता था और उस करेंसी का नाम गल्फ रुपया था। 1961 में, कुवैत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हो गया। आपको बता दें कि कुवैत 1963 में पहला अरब देश बना था। जहां सरकार चुनी गई। कुवैती सरकार ने 1960 में पहली बार अपनी मुद्रा को विश्व बाजार में पेश किया। भारतीय रुपये की बात करें तो उस समय इसकी कीमत 13 रुपये से लेकर 1 कुवैती दीनार तक थी। कुवैती दीनार की विनिमय दर अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1970 में तय की गई थी। आपको बता दें कि कुवैती दीनार अभी भी स्थिर दर पर है।

शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 66 पैसे टूटा

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नवभारत टाइम्स 11 घंटे पहले

मुंबई, 16 नवंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में अमेरिकी मु्द्रा की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती के बीच रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 66 पैसे टूटकर 81.57 पर आ गया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 81.41 पर खुला, और फिर गिरावट के साथ 81.57 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 66 पैसे की कमजोरी दर्शाता है।

रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 37 पैसे की तेजी के साथ 80.91 पर बंद हुआ था।

इसबीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.17 प्रतिशत बढ़कर 106.58 पर पहुंच गया।

सरकार तेल निर्यात, अप्रत्याशित लाभ कर की हर पखवाड़े समीक्षा करेगी

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नवभारत टाइम्स 04-07-2022

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) भारत में उत्पादित तेल और विदेशों में निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर हाल में लागू किए गए अप्रत्याशित लाभ कर की सरकार हर पखवाड़े समीक्षा करेगी।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह समीक्षा विदेशी मुद्रा विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर की जाएगी। हालांकि, इन करों को वापस लेने के लिए अभी कोई स्तर तय नहीं किया गया है।

राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय तेल दरों को देखते हुए उपकर को वापस लेने के लिए तेल की कीमतों का 40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर वापस आना फिलहाल अवास्तविक आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं है।

समीक्षा इस बात पर आधारित है कि यदि कच्चे तेल की कीमत गिरती है, तो अप्रत्याशित लाभ खत्म हो जाएगा और नए कर वापस ले लिए जाएंगे।

बजाज ने कहा, ‘‘विदेशी मुद्रा विनिमय दरों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर दो सप्ताह में हम इसकी समीक्षा करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘डॉलर से रुपये के विनिमय दर क्या है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल, कच्चे तेल की कीमत, कच्चे तेल की घरेलू लागत क्या है, हम इसकी समीक्षा करते रहेंगे। एक बार जब हम समीक्षा करेंगे, तो आप खुद समझ जाएंगे।’’

भारत एक जुलाई से वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से पेट्रोलियम कंपनियों को होने वाले अप्रत्याशित लाभ पर कर लगाया है।

सरकार ने एक जुलाई से पेट्रोल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर छह रुपये प्रति लीटर और डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर का कर लगाया है।

इसके अतिरिक्त घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन का कर लगाया गया है।

सरकार ने 23 मई को पेट्रोल पर आप मुद्रा विनिमय दर कैसे तय करते हैं आठ रुपये प्रति लीटर के उत्पाद शुल्क की कटौती की थी। डीजल पर उत्पाद शुल्क छह रुपये प्रति लीटर घटाया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उस समय कहा था कि उत्पाद शुल्क कटौती से सरकार को सालाना एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।

इसबीच ब्रेंट क्रूड सोमवार को 112.03 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था। दूसरी ओर रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 78.99 पर आ गया।

सीबीआईसी के अध्यक्ष विवेक जौहरी ने भी कहा कि अप्रत्याशित लाभ कर की समीक्षा के लिए अभी कोई सीमा तय नहीं की गई है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, हमने इसके बारे में नहीं सोचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और शोधित उत्पादों की कीमतों के आधार पर हर 15 दिनों में दरों की समीक्षा की जाएगी।’’

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