प्रमुख भारतीय स्टॉक एक्सचेंज

ईटीएफ क्या है

ईटीएफ क्या है

ETF क्या है इन्वेस्ट कैसे करे | etf meaning in hindi

ETF (Exchange Traded Fund) होता क्या है (etf meaning in hindi) और क्या आपको इसमें इन्वेस्ट करना चाहिए। तो आज हम जानेंगे ETF के बारे में बहुत ही सरल भाषा में सब कुछ। बहुत लोगो को शेयर मार्केट में रिस्क नहीं लेना चाहते है उसके लिए है ये फण्ड।

ETF (Exchange Traded Fund) क्या है (etf meaning in hindi):-

Mutual Fund में कंपनी को लोग पैसा देता है और उसका फंड मैनेजर अलग अलग शेयर में निवेश करता है। लेकिन Index Fund में लोगों का पैसा Direct Nifty और Sensex पर पैसा लगा देते हैं, इसमें फंड मैनेजर अलग अलग करके शेयर में निबेश की जरुरत नहीं पड़ती। एक ही index पर निवेश करते है। Nifty यानी देश ईटीएफ क्या है का टॉप 50 शेयर्स का बास्केट और Sensex 30 कंपनी का टोकरी होता हैं। Index fund आप म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी से खरीद सकते है।

ऐसे ही बहुत सारे शेयर्स के बास्केट होता है जिसमे इंडेक्स फंड पैसा लगाते हैं। इसी तरह ETF (Exchange Traded Fund) index fund की तरह ही होता हैं। इसमें कोई भी एक एक करके शेयर में इन्वेस्ट नहीं करता, हमेशा शेयर्स के बास्केट में ही इन्वेस्ट करता हैं। ETF एक fund है जो किसी Index को अनुकरण करता हैं। आप Direct Nifty या Sensex पर इन्वेस्ट नहीं कर सकता। ETF के जरिये आप इसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं। जब ये इंडेक्स ऊपर जाएगा आपका ETF भी ऊपर जाएगा।

ETF में कैसे इन्वेस्ट करे:-

ETF में इन्वेस्ट करने के लिए आपके पास Demat Account होना जरूरी हैं। आप डायरेक्ट शेयर मार्केट से ही ETFको खरीद सकते है। बहुत सारे ऐसे ETF है जहा पर आप खरीद सकते है। उनमे से है- Niftybees, HDFC Sensex ETF, Kotak PSU Bank ETF etc।

ETF क्या है इन्वेस्ट कैसे करे etf meaning in hindi

शेयर मार्केट में ETF कैसे आता है:-

जब भी कंपनी को शेयर मार्केट में ETF लाना होता है। तो कंपनी जिस भी सेक्टर, जितने पैसा का लाना है उस सेक्टर का उतने पैसा का शेयर खरीद लेता है। फिर मार्केट में उस सेक्टर का ETF लोगों के लिए Issue होते हैं। उसके बाद बाज़ार में उसका खरीद बेच होते रहते हैं। लेकिन ETF में जितना पैसा का Issue होता है उससे ज्यादा कंपनी और आकार बड़ा नहीं कर सकते।

उदाहरण के लिए मान लीजिए:- ABC कंपनी एक 500 cr का NIFTY ETF लाना चाहती है। तब ये कंपनी 500 cr का पहले NIfty का शेयर खरीद लेंगे उसके बाद ही कंपनी बाज़ार में उतने पैसा का ETF निकल पाएगा। फिर बाद में 500 cr से ज्यादा और बड़ा नहीं कर सकता।

Disadvantage क्या है ETF में:-

  • लिक्विडिटी कम है:- जब आप कभी ETF खरीदते हो तो उसको बेचने के लिए आपको खरीदार मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। क्युकी लोग इसमें ज्यादा इन्वेस्ट करना पसंद नहीं करते। ज्यादातर लोग शेयर में ही इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं आपको ETF खरीदने से पहले लिक्विडिटी है या नहीं जरूर देख लेना चाहिए।
  • शुल्क थोड़ा ज्यादा है:- जैसा की ETF शेयर मार्केट से खरीदना पड़ता है। इसलिए आपको शेयर जैसा ही शुल्क देना पड़ता है। आपको Demat अकाउंट Charge, Stamp duty और भी बहुत तरह का शुल्क देना होगा।

Advantage क्या है ETF का:-

  • किसी भी समय खरीदना:- म्यूच्यूअल फण्ड में एक दिन का NAV पे ही आप खरीद सकते हो। लेकिन ETF शेयर मार्केट में लिस्टेड होने के कारण स्टॉक की तरह किसी भी टाइम खरीद सकते हो। जैसे जैसे नीचे ऊपर होता है आप खरीद बेच कर सकते हैं।
  • सेक्टर का फ़ायदा:- ETF में आप किसी भी अलग अलग सेक्टर पर आप इन्वेस्ट कर सकते हैं। इससे आपको पोर्टफोलियो को Diversification करने में मदद मिलता हैं।

क्या ETF में इन्वेस्ट करना सही रहेगा:-

ETF में थोड़ा Index fund से शुल्क कम होती है। लेकिन अब बहुत सारे कम शुल्क Index fund आ गए हैं लगभग दोनों का बराबर होते हैं। यदि आपको किसी सेक्टर के हिसाब से खरीदना चाहते हो तो आप ETF में खरीदारी कर सकते हैं। इसमें आपको थोड़ा रिस्क कम होता हैं। आपको यदि लंबे समय के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हो तो आप ETF के साथ जा सकते हैं।

उम्मीद करता हु आपको ETF क्या है (etf meaning in hindi),ETF में इन्वेस्ट कैसे करे सीखने को मिला हैं। आपके मन में और कोई सवाल या सुझाव है तो कमेंट में जरूर बताएं। शेयर मार्केट के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप हमारे और भी पोस्ट को पढ़ सकते हैं।

एसेट ईटीएफ पैसिव फंड के संबंध में मिरे करता है सेबी के दिशानिर्देशों का अनुपालन

मई 2022 में सेबी द्वारा जारी किये गये नए दिशानिर्देशों को ध्यान मे रखकर मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स ने इन नई आवश्यकताओं का अनुपालन किया है.

एसेट ईटीएफ

वैश्विक मानक दिशानिर्देशों का ध्यान रखते हुए लिक्विडिटी, ट्रैकिंग त्रुटियों और अन्य प्रमुख ईटीएफ संकेतकों का प्रबंधन करने के लिए मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) प्रा.लि. ने वर्ष २०१८ में देश में अपनी सहयोगी कंपनी मिरे एसेट कैपिटल ईटीएफ क्या है मार्केट (इंडिया) प्रा.लि के साथ एक मार्केट-मेकिंग सिस्टम बनाया था. कंपनी के पास अब कुल मिलाकर तीन मार्केट मैकर्स हैं, जिनमें मिरे एसेट कैपिटल मार्केट (इंडिया) प्रा. लि. शामिल है, जो एक्सचेंज पर सक्रिय रूप से ईटीएफ की निगरानी करता है.

अपने इनोवेटिव ईटीएफ उत्पादों के लिए प्रसिद्ध, मिरे एसेट ने मिरे एसेट निफ्टी 100 ईएसजी सेक्टर लीडर्स ईटीएफ लॉन्च किया है, जो देश ईटीएफ क्या है में पहला ईएसजी थीमैटिक ईटीएफ है और मिरे एसेट निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग ईटीएफ भी लॉन्च किया है.

मई 2022 में एएमसी मिरे ने ईवी और ऑटोनॉमस, एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे विकसित प्रौद्योगिकी थीम ईटीएफ के तहत चार अलग-अलग फंड ऑफ फंड्स दाखिल किए हैं. यह इसलिये संभव हुआ क्योंकि एएमसी ईटीएफ के लिए पारदर्शिता और तरलता के महत्व को समझना चाहता है. एमएमसी की मूल कंपनी मिरे एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स, वैश्विक स्तर पर 14वीं सबसे बड़ी ईटीएफ प्रदाता कंपनी है और नौ देशों में 400 से अधिक ईटीएफ उत्पादों का संचालन कर रही है, जिसमें इसका भारत स्थित कार्यालय (दिसंबर 2021 तक) शामिल है. इसके अलावा, मिरे एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की सहायक कंपनी ग्लोबल एक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका में थीम वाले ईटीएफ आपूर्तिकर्ताओं में से एक है.

मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के देश में प्रमुख ईटीएफ उत्पाद मिरे एसेट निफ्टी 50 ईटीएफ और मिरे एसेट एनवाईएसई फेंग+ ईटीएफ हैं.

निवेशकों के लिए क्या होगा बड़ा बदलाव?

1. निवेशक अपनी वेबसाइट पर एएमसी द्वारा बताए गए ट्रैकिंग त्रुटियों और ट्रैकिंग अंतर डेटा देख सकते हैं.

2. ईटीएफ/इंडेक्स फंड (डेट ईटीएफ/इंडेक्स फंड के अलावा) की ट्रैकिंग त्रुटि 2 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए. डेट ईटीएफ और इंडेक्स फंड के लिए एक वर्ष में औसतन वार्षिक ट्रैकिंग अंतर 1.25 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए.

3. निवेशक ईटीएफ इकाइयों को सीधे एएमसी के साथ सब्सक्राइब और रिडीम कर सकते हैं यदि मूल्य २५ करोड़ रुपये से अधिक है.

4. एएमसी प्रत्येक ईटीएफ के लिए कम से कम 2 मार्केट मैकर्स नियुक्त करेगी.

5. एएमसी, टीईआर योजना की अधिकतम स्वीकार्य सीमा के भीतर मार्केट मैकर्स को प्रोत्साहन प्रदान कर सकती है. इस संबंध में एएमसी से अपनी वेबसाइट पर और ईटीएफ के योजना सूचना दस्तावेज (एसआईडी) में पर्याप्त रूप से प्रकट करने की आवश्यकता है.

6. एक्सचेंज पर ईटीएफ की लिक्विडिटी संभावित रूप से बेहतर होने की उम्मीद है

7. सांकेतिक शुद्ध संपत्ति मूल्य (आई-एनएवी) को स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा निर्धारित आवृत्ति के साथ अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाना है. इससे निवेशकों को यह जानने में मदद मिलने की उम्मीद है कि उन्हें ईटीएफ में संभावित रूप से किस कीमत पर कारोबार करना चाहिए.

निवेशक ईटीएफ क्या है को क्या पता होना चाहिए?

मार्केट मेकर की क्या भूमिका है?

मार्केट मेकर एक्सचेंज का व्यक्तिगत भागीदार या सदस्य फर्म होता है जो अपने खाते के लिए सिक्योरिटीज को खरीदता और बेचता है. मार्केट मैकर बाजार को तरलता और गहराई प्रदान करते हैं जबकि वें बिड-आस्क स्प्रेड में अंतर से लाभ कमाते हैं.

ट्रैकिंग त्रुटि और ट्रैकिंग अंतर क्या है और इसका मेरे निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

1. ट्रैकिंग त्रुटि और ट्रैकिंग अंतर यह मापने का तरीका है कि ईटीएफ अपने अंतर्निहित सूचकांकों को कितनी अच्छी तरह ट्रैक करते हैं.

2. ट्रैकिंग अंतर यह मापता है कि किसी इंडेक्स उत्पाद का रिटर्न उसके अंतर्निहित इंडेक्स से किस हद तक भिन्न है और ट्रैकिंग त्रुटि इंगित करती है कि फंड के औसत ट्रैकिंग अंतर को बनाने वाले व्यक्तिगत डेटा बिंदुओं में कितनी परिवर्तनशीलता मौजूद है.

3. इस प्रकार कम ट्रैकिंग अंतर और कम ट्रैकिंग त्रुटि का मतलब है कि ईटीएफ अपने बेंचमार्क को अच्छी तरह से ट्रैक करता है.

आईएनएवी क्या है और इसे देखें?

1. आईएनएवी का मतलब सांकेतिक नेट असेट वेल्यू है. आईएनएवी अपने अंतर्निहित घटकों के बाजार मूल्यों के आधार पर ईटीएफ का इंट्राडे सांकेतिक मूल्य प्रदान करता है. मूल्य स्टॉक एक्सचेंज पर प्रदर्शित होता है जिस पर ईटीएफ सूचीबद्ध होता है.

2. यह ईटीएफ के मूल्य के लगभग रियल टाइम को प्रस्तुत करता है इसलिए,आईएनएवी निवेशकों को एक्सचेंज पर महत्वपूर्ण प्रीमियम और डिस्काउंट ट्रेडिंग से बचने में मदद कर सकता है.

मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के ईटीएफ सेल्स हेड उमेश कुमार डेला ने कहा, ''जबकि ईटीएफ और पेसिव इंडस्ट्री को अभी भी आगे बढऩे के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है, हाल ही में जारी किया गया सेबी परिपत्र सही दिशा में बहुत स्वागत योग्य कदम है और इससे देश में ईटीएफ के सामने आने वाली कुछ चुनौतियों को कम करने की उम्मीद है. मेरा मानना है कि यह निवेशकों के बीच ईटीएफ के प्रति विशेष रूप से खुदरा खंड के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है. ईटीएफ के बारे में उत्पाद निर्माता से सही निवेशक शिक्षा और जागरूकता अभियान के चलते संभावित रूप से निवेशकों के लिए उनके रिटर्न और जोखिम प्रोफाइल के अनुकूल वांछित जोखिम लेने के अवसरों की अधिकता की पेशकश करने की उम्मीद है.

Prabhat Khabar App :

देश, दुनिया, बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस अपडेट, टेक & ऑटो, क्रिकेट और राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

गोल्ड इटीएफ (Gold ETF) क्या है | गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में क्या अंतर है

गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में क्या अंतर है?

गोल्ड इटीएफ और गोल्ड बांड की जानकारी- वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के दौरान लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के इस दौर में जमा पर ब्याज दरें तेजी से घटी हैं। पिछले महीनों में देश के कई बड़े बैंकों ने जमा पर ब्याज दरों को घटाया है। इसके साथ ही निवेश से मिलनें वाले रिटर्न में भी भारी कमी आई है। इन सभी के बीच एक ऐसा निवेश उत्पाद है, जिसनें इस बीच बेहतर रिटर्न दिया है और यह है सोना जिसे हम गोल्ड (Gold) कहते है| जिन लोगो नें सोनें में निवेश किया था, उन्हें 40 फीसद तक रिटर्न मिला है। इस समय सोनें की कीमतों में उछाल का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। जिसके कारण इसके निवेशकों का रिटर्न भी बढ़ता जा रहा है। हालाँकि सोने में निवेश के लिए मार्केट में कई विकल्प उपलब्ध हैं, इन्ही में से एक गोल्ड इटीएफ भी है| तो आईये जानते है, गोल्ड इटीएफ (Gold ETF) क्या है, गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में क्या अंतर है?

गोल्ड ईटीएफ क्या है (What Is Gold ETF)

Gold ETF Kya Hai- गोल्ड ईटीएफ अर्थात गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold Exchange Traded Fund) के माध्यम से सोने में निवेश किया जाता है| वर्तमान समय में गोल्ड ईटीएफ की ट्रेडिंग देश के सभी बड़े एक्सचेंज के ऊपर हो रही है| यहां निवेशक इलेक्ट्रॉनिक रुप में सोने में निवेश कर सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ एक्सचेजों पर लिस्टेड होते हैं। यहां इसे डीमेट अकाउंट के जरिए खरीदा और बेचा जा सकता है।

गोल्ड ईटीएफ्स 99.5 फीसद शुद्धता वाला वास्तविक भौतिक सोना खरीद कर अपने एसेट्स बनाते हैं। यह भौतिक सोना बैंकों के संरक्षण में रहता है और सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार समय-समय पर इसका मूल्य लगता है। गोल्ड ईटीएफ का भौतिक रूप से सोना रखना निवेशकों को एक अलग विश्वास देता है। खास बात यह है कि निवेशक भी सोने की भौतिक डिलीवरी ले सकते हैं।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश कैसे करते है (How To Invest In Gold ETF)

Gold ETF Me Nivesh Kaise Kare- गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड अर्थात गोल्ड ईटीएफ में निवेशक को निवेश करनें के लिए सबसे पहले ट्रेंडिंग और डीमैट अकाउंट खुलवाना होता है। अकाउंट खुलवानें के बाद ब्रोकर के ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन कर ईटीएफ विकल्प को चुनें। आप जितनी यूनिट खरीदना चाहें, उतनी यूनिट के लिए खरीद का ऑर्डर दे सकते हैं। कुछ समय पश्चात यूनिट्स आपके डिमेट अकाउंट में आ जायेंगे और आपके खाते से पैसा कट जाएगा। निवेशक एकमुश्त या एसआईपी द्वारा भी निवेश कर सकते हैं।

गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में अंतर (Difference Of Gold Bond And Gold ETF)

Gold Bond Aur Gold ETF Me Antar- निवेश के दृष्टिकोण से सोने को हमेशा से निवेश का एक अच्छा साधन माना जाता है| लेकिन अधिकांश लोग भौतिक रूप से सोना खरीदना ही पसंद करते हैं, जैसे ज्वैलरी, कॉइन्स, बिस्किट आदि| यदि हम गोल्ड में निवेश को लेकर बात करे तो गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ भी माध्यम हैं| ऐसे में सोने में निवेश के लिए कौन सा जरिया फायदेमंद है, इसके लिए हम आपको गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में अंतर बता रहे है, जो इस प्रकार है-

गोल्ड बॉन्ड (Gold Bond)

1. कोई भी व्यक्ति गोल्ड बॉन्ड के रूप में 1 ग्राम से लेकर 4 किलो तक ही सोना खरीद सकते है

2. गोल्ड बॉन्ड में पांच वर्षों का लॉक-इन पीरियड है, इसके बाद ही इसे भुनाया जा सकता है

3. गोल्ड बॉन्ड खरीदने के 3 साल बाद बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी LTCG टैक्स लगता है| यदि तीन वर्ष से पहले विक्रय करते है, तो एप्लीकेबल स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लगेगा

4. गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन और ब्याज दोनों का लाभ लिया जा सकता है, साथ ही इस पर सॉवरेन गारंटी भी रहती है

5. गोल्ड बॉन्ड की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसे सेकंडरी मार्केट में बेचने पर लिक्विडिटी का इश्यू आता है

गोल्ड इटीएफ (Gold ETF)

1. गोल्ड इटीएफ के रूप में कोई भी व्यक्ति न्यूनतम 1 ग्राम सोने से लेकर कितना भी निवेश कर सकता है, क्योंकि इसमें कोई अपर लिमिट नहीं है|

2. Gold ETF में कोई लॉक इन पीरियड नहीं है

3. गोल्ड इटीएफ पर भी 3 साल का होल्डिंग पीरियड पूरा करने के बाद बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी LTCG टैक्स लगता है, वहीं 3 साल से पहले बेचने पर एप्लीकेबल स्लैब रेट से टैक्स लगता है

4. Gold ETF में खरीद और बिक्री कभी भी की जा सकती है

5. गोल्ड इटीएफ की सबसे बड़ा माईनस पॉइंट यह है कि डीमैट चार्ज देना अनिवार्य है और कभी-कभी इसका वॉल्यूम बहुत लो रहता है

सिल्वर ईटीएफ से निवेशकों को पोर्टफोलियो के विविधीकरण में मदद मिलेगी: विशेषज्ञ

सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के लिए नियम आने के साथ अब निवेशक चांदी में अधिक तरल तरीके से निवेश कर सकेंगे और इससे उन्हें पोर्टफोलियो के विविधीकरण में मदद मिलेगी।

Credit- Unsplash

सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के लिए नियम आने के साथ अब निवेशक चांदी में अधिक तरल तरीके से निवेश कर सकेंगे और इससे उन्हें पोर्टफोलियो के विविधीकरण में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ दिन पहले ही चांदी ईटीएफ के लिए परिचालन मानदंड जारी किए हैं। इसके तहत ऐसी निवेश योजना को चांदी और चांदी से संबद्ध उत्पादों में कम से कम 95 प्रतिशत का निवेश करना होगा। ये मानदंड नौ दिसंबर, 2021 से प्रभावी होंगे।

वर्तमान में म्यूचुअल फंड इकाइयों को गोल्ड ईटीएफ पेश करने की ही अनुमति है। लेकिन नए प्रावधान आने के बाद सिल्वर ईटीएफ का रास्ता भी खुल गया है। नियो के रणनीति प्रमुख स्वप्निल भास्कर ने कहा, ‘‘अब लोग सिल्वर ईटीएफ में निवेश करके चांदी भी रख सकेंगे। चूंकि यह एक उच्च विनियमन वाला उत्पाद है, इसलिए निवेशक इसकी शुद्धता के बारे में निश्चित होंगे। खुले बाजार से चांदी लेने पर उन्हें ऐसी निश्चिंतता नहीं मिलती है।’’

महिलाओं के वित्तीय मंच एलएक्सएमई की संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता ने कहा, ‘‘अब निवेशक चांदी में निवेश के पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तरल तरीके से निवेश कर सकेंगे।’’ उन्होंने कहा कि इससे पोर्टफोलियो के विविधीकरण में भी मदद मिलेगी क्योंकि सोने के बाद चांदी को भी बहुमूल्य धातु की श्रेणी में रखा जाता है।

निप्पन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के ईटीएफ उप-प्रमुख हेमेन भाटिया ने कहा, ‘‘निवेशकों के लिए सोने के बाद अब पारदर्शी तरीके से एक जिंस के रूप में चांदी में निवेश करना बहुत सुविधाजनक हो जाएगा।’’ नियमों के तहत सिल्वर ईटीएफ योजना में चांदी की कीमत को लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन या एलबीएमए के चांदी के दैनिक हाजिर मूल्य के आधार पर बेंचमार्क किया जाएगा। ऐसे ईटीएफ का शुद्ध संपत्ति मूल्य (एनएवी) एएमसी की वेबसाइट पर डाला जाएगा। इस कदम से निवेशकों को कीमती धातु का अधिक वास्तविक मूल्य निर्धारण मिलेगा।

ये मानदंड गोल्ड ईटीएफ के लिए मौजूदा नियामकीय तंत्र के अनुरूप हैं, क्योंकि सेबी ने एलबीएमए के माध्यम से एएमसी के लिए खुद 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी की छड़ें रखने की प्रथा को जारी रखा है। इससे खुदरा निवेशकों को शुद्धता, जोखिम, भंडारण और बीमा की चिंता किए बिना चांदी के ईटीएफ में निवेश करने की अनुमति मिलेगी।

Kotak Mahindra AMC ने Silver ETF की घोषणा की, 21 नवंबर को खुलेगा NFO

Kotak Mahindra AMC ने Silver ETF की घोषणा की, 21 नवंबर को खुलेगा NFO

डीएनए हिंदी: कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (KMAMC) ने गुरुवार को अपने ओपन-एंडेड सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के लॉन्च की घोषणा की, जो निवेशकों को कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में प्रचलित आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के खिलाफ बचाव का अवसर प्रदान करेगा. न्यू फंड ऑफरिंग (NFO) 21 नवंबर, 2022 को सभी निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगाऔर 5 दिसंबर, 2022 को बंद हो जाएगा. फंड हाउस ने कहा कि निवेशकों के लिए कोई भार नहीं होगा.

"ट्रैकिंग एरर के अधीन कोटक सिल्वर ईटीएफ का उद्देश्य घरेलू कीमतों में फिजिकल सिल्वर के प्रदर्शन के अनुरूप रिटर्न उत्पन्न करना है. यह योजना सिल्वर से संबंधित उपकरणों में भी भाग ले सकती है. एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCD) जिसमें चांदी अंतर्निहित है सिल्वर ईटीएफ के लिए सिल्वर से संबंधित इंस्ट्रूमेंट माना जाएगा." हालांकि, इस बात का कोई आश्वासन या गारंटी नहीं है कि योजना के निवेश उद्देश्य को प्राप्त किया जाएगा.

फंड की इकाइयां निर्माण इकाई के आकार या उसके गुणकों में होंगी. प्रत्येक निर्माण इकाई में कोटक सिल्वर ईटीएफ (Kotak Silver ETF) की 30,000 इकाइयां होती हैं. प्रत्येक इकाई लगभग 1 ग्राम चांदी के बराबर होती है. सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) में निवेश अपने भौतिक रूप में खरीदने की तुलना में आसान और सुरक्षित है. यह आसान तरलता प्रदान करता है और कम मात्रा में निवेश करने की सुविधा प्रदान करता है. इसके अलावा, यह धातु के बाजार के बराबर मूल्य प्रदान करते हुए फिजिकल सिल्वर की तुलना में कम लेनदेन लागत प्रदान करता है.

विश्व रजत सर्वेक्षण 2022 (World Silver Survey 2022) के मुताबिक महामारी के बाद, औद्योगिक गतिविधि में तेजी और धातु के लिए खुदरा निवेशकों की भूख में वृद्धि के कारण चांदी की मांग आपूर्ति से अधिक हो गई है. 2021 में सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स में रिकॉर्ड इनफ्लो हुआ. अच्छी बात यह है कि इस धातु ने 5 साल की अवधि में 43% का पूर्ण रिटर्न दिया है. हालांकि पिछला प्रदर्शन भविष्य में कायम रह सकता है या नहीं भी हो सकता है.

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के समूह अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा, “हमारा सिल्वर ईटीएफ लॉन्च विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों तक आसान और कुशल पहुंच प्रदान करने के हमारे निरंतर प्रयास के अनुरूप है. यह चांदी को एक परिसंपत्ति के रूप में सुविधाजनक पहुंच प्रदान करेगा जो न केवल एक कीमती धातु है बल्कि इसके कई औद्योगिक उपयोग भी हैं. वर्ष की शुरुआत से चांदी की कीमतों में मजबूती उन लोगों के लिए एक अच्छा अवसर प्रदान करती है जो विविधीकरण के लिए इस संपत्ति में कुछ पैसा आवंटित करना चाहते हैं.

रेटिंग: 4.35
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 411
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *