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म्यूचुअल फंडस

म्यूचुअल फंडस
बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक

डेब्ट फंड ओर इक्विटी फंड में से कौन सा फंड है बेहतर

डेट फंड अपनी म्यूचुअल फंडस क्रेडिट रेटिंग के आधार पर विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। एक सुरक्षा क्रेडिट रेटिंग दर्शता है कि जारीकर्ता अपने द्वारा दिए गए रिटर्न को अस्वीकार करने में डिफ़ॉल्ट होगा या नहीं। डेट फंड का फंड मैनेजर यह सुनिश्चित करता है कि वह उच्च क्रेडिट गुणवत्ता वाले उपकरणों में निवेश करे।

उच्च क्रेडिट रेटिंग का मतलब है, कि इकाई को नियमित रूप से ऋण सुरक्षा पर ब्याज का भुगतान करने की संभावना है और साथ ही परिपक्वता पर मूल राशि का भुगतान करना है।

कम-रेटेड प्रतिभूतियों की तुलना में उच्चतर प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंडस डेट फंड कम अस्थिर होते हैं। इसके अतिरिक्त, परिपक्वता फंड मैनेजर की निवेश रणनीति और अर्थव्यवस्था में समग्र (Overall) ब्याज दर शासन पर भी निर्भर करती है।

गिरती ब्याज दर व्यवस्था प्रबंधक को लंबी अवधि की प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके विपरीत, एक बढ़ती ब्याज दर शासन उसे अल्पकालिक प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

इक्विटी म्यूचुअल फंड के लाभ

1) एक इक्विटी फंड एक ऐसा फंड है जो मुख्य रूप से शेयर बाजारों में निवेश करता है। फंड का बड़ा हिस्सा कंपनियों के शेयरों में लगाया जाता है।

2) बाजार पूंजीकरण, क्षेत्रों, फंड की संरचना, निवेश उद्देश्यों आदि के आधार पर इक्विटी फंड को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

3) इक्विटी फंड निवेशकों को उच्च रिटर्न प्रदान कर सकते हैं लेकिन वे उच्च जोखिम जोखिम के साथ आते हैं। इक्विटी फंड में जोखिम उस इक्विटी फंड के प्रकार पर निर्भर करता है जिसमें आप निवेश कर रहे हैं।

4) एक म्यूचुअल फंडस इक्विटी फंड अलग-अलग अनुपात में कंपनियों के इक्विटी शेयरों में अपनी संपत्ति का कम से कम 65% निवेश करता है। यह निवेश जनादेश के अनुरूप होना चाहिए।

5) यह विशुद्ध रूप से लार्ज-कैप, मिड-कैप या स्मॉल-कैप फंड या बाजार पूंजीकरण का मिश्रण हो सकता है। इसके अलावा, निवेश शैली वैल्यू ओरिएण्टल या ग्रोथ ओरिएण्टल हो सकती है।

6) इक्विटी शेयरों के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बाटने के बाद, शेष राशि ऋण और मुद्रा बाजार के साधनों में जाएगी। यह अचानक रिडेम्पशन अनुरोधों की देखभाल करने के साथ-साथ कुछ हद तक जोखिम के स्तर को नीचे लाने के लिए है। फंड मैनेजर बदलते बाजार की चाल का फायदा उठाने और अधिकतम रिटर्न हासिल करने के लिए खरीदारी या बिक्री के फैसले करता है। डेट म्यूचुअल फंड और इक्विटी म्यूचुअल फंड के बीच मूल अंतर

1 ) डेब्ट म्यूचुअल फंड निवेश

डेट फंड एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है जो शेयरहोल्ड पर निवेश करता है।

डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों से एकत्रित कुल धन का एक बड़ा अनुपात (कम से कम 65%) निश्चित आय प्रतिभूतियों जैसे कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी बांड, बैंकों द्वारा जारी किए गए बांड,ट्रेजरी बिल आदि में निवेश करते हैं।

2 ) डेट फंड में निवेश कारण

डेट फंड में निवेश करने का मूल कारण ब्याज आय और पूंजीगत एप्रीसिएशन अर्जित करना है। जारीकर्ता परिपक्वता अवधि के साथ-साथ आपके द्वारा प्राप्त ब्याज दर को पूर्व-निर्धारित करता है।

3 ) डेट फंड अधिक सुरक्षित

इक्विटी फंडों की तुलना में डेट फंड अधिक सुरक्षित होते हैं क्योंकि वे मुख्य रूप से रेटेड और जोखिम मुक्त सरकार और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करते हैं।

4 ) शॉर्ट-टर्म

लघु अवधि के मध्यम अवधि के लक्ष्यों के लिए डेट फंड का चयन करना चाहिए।

5 ) स्थिर रिटर्न

डेट फंड अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन कम रिटर्न के लिए मध्यम होते हैं।

भविष्य में लक्ष्य हासिल के लिए

डेट-ओरिएंटेड फंड्स में निवेशक नियमित और स्थिर रिटर्न की तलाश करते हैं या कुछ वित्तीय लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं जैसे कि घर खरीदना आदि |

इस तरह के निवेश आम तौर पर छोटे से मध्यम अवधि के लिए किए जाते हैं|

1 ) इक्विटी फंडस

एक इक्विटी फंड वो है जो शेयरधारक के पैसे को स्टॉक में निवेश करता है।

2) लॉन्ग-टर्म निवेश

इक्विटी म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल होते हैं जो जोखिम-से-प्रभावित नहीं होते हैं और मध्यम से लॉन्ग-टर्म निवेश की तलाश में रहते हैं।

एक निवेशक को लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों के लिए एक इक्विटी फंड का चयन करना चाहिए|

3) उच्च रिटर्न

इक्विटी फंड में उच्च रिटर्न की पेशकश करने की क्षमता होती है, लेकिन जोखिम के साथ|

4 ) परिपक्वता (maturity) तिथि

इक्विटी फंड्स में पूर्वनिर्धारित (predefined ) परिपक्वता (maturity) तिथि नहीं होती है और इसे निवेशक के अनुरोध पर भुनाया जा सकता है। लॉक-इन अवधि की अनुपस्थिति निधि की लिक्विड प्रकृति को जोड़ती है।

5 ) अस्थिर प्रकृति (Unstable nature )

यह निवेशकों को बाजार की अस्थिर प्रकृति (Unstable nature ) से लाभ उठाने में सक्षम बनाता है।

इस प्रकार, आप अपने वित्तीय उद्देश्य के आधार पर डेट म्यूचुअल फंड या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना चुन सकते हैं - चाहे वह पूंजी की सराहना हो या नियमित आय, निवेश क्षितिज (horizon) और जोखिम-वहन (risk-carrying) क्षमता।

निष्कर्ष

7) यदि आप अभी भी अनिश्चित हैं कि कहां निवेश करना है, तो आप हाइब्रिड फंडों को देख सकते हैं जो अनिवार्य रूप से ऋण और इक्विटी दोनों में निवेश करते हैं; साथ ही सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी)।

SEBI ने दिए म्यूचुअल फंड हाउस को निर्देश, क्या है म्यूचुअल फंड ?

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। आज शायद ही कोई ऐसा होगा जो एक्स्ट्रा इनकम के बारे में नहीं सोचता होगा। हर व्यक्ति अपनी सेविंग्स को कहीं ऐसी जगह इन्वेस्ट करना चाहता है, जिससे उसे अच्छे रिटर्न मिले और एक्स्ट्रा इनकम हो। इसके लिए लोग अलग-अलग जगह इन्वेस्ट करने के बारे में सोचते हैं। कोई अपना पैसा म्यूचुअल फंडस बैंक में रख कर ब्याज द्वारा एक्स्ट्रा इनकम कमाता है तो कोई गोल्ड में इन्वेस्ट करके। कई लोग शेयर बाजार में भी इन्वेस्ट करते हैं तो कई फिक्स्ड डिपोसिट करते हैं। इन्वेस्ट करने के लिए Mutual Fund (म्यूचुअल फंड) भी एक बहुत ही अच्छा उपाय है। जिसको लेकर SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउस को नए निर्देश दिए हैं।

SEBI ने दिए म्यूचुअल फंड हाउस को नए निर्देश :

दरअसल,बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा म्यूचुअल फंड हाउस के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउस को कहा है कि, वह 1 जुलाई तक कोई भी नई योजना लॉन्च नहीं कर सकेंगे। बताते चलें, यदि निवेशक वितरकों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से निवेश करते हैं तो ये पैसा लोगों के खातों के बजाय म्यूचुअल फंड हाउसों के अकाउंट में जाना चाहिए। इस मामले में SEBI ने एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया को एक पत्र भी लिखा है। इस पत्र में SEBI ने कहा कि, 'जब तक मामला नहीं सुलझता, तब तक नई योजनाएं लॉन्च करने पर पाबंदी लागू की जाती हैं।' आपकी जानकारी के लिए बता दें, क्या है Mutual Fund और इसमें कैसे इन्वेस्ट कर सकते हैं।

क्या होते हैं Mutual Fund ?

जैसा कि, Mutual Fund के नाम से ही समझ आता है, (Mutual मतलब आपसी) कुछ लोग आपस में मिल कर एक फण्ड हाउस में म्यूचुअली पैसा देते हैं। उसे Mutual Fund (हिंदी में पारस्परिक निधि) कहते हैं। इसे एक तरह का सामूहिक इन्वेस्टमेंट भी कहा जाता है। फण्ड हाउस उस फण्ड को मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए एक हाइली क्वालीफाईड फण्ड मैनेजर को अपॉइंट करता है। फण्ड मैनेजर आपके इन्वेस्टमेंट के बदले अपना 2-2.5 % फीस लेता है, साथ ही जो फायदा होता है वो आपके अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है। बाकि बचा रिटर्न इन्वेस्टर्स को उनके इन्वेस्टमेंट के आधार पर बांट दिया जाता है। Mutual Fund में सालाना 10 से 20% तक की ग्रोथ आसानी से देखने को मिल सकती है।

Mutual Fund में कैसे कर सकते हैं इन्वेस्ट :

आपको Mutual Fund में इन्वेस्ट करने के लिए किसी बैंक या ऐसीट मनेजमेंट कम्पनी की वेबसाइट पर E-KYC को पूरा करना होता है। इसके अलावा पासपोर्ट साइज़ फोटो के साथ पहचान पात्र की कॉपी, पैन नंबर और निवास के पते का प्रमाण देना अनिवार्य होता है। म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करना एक सुरक्षित इन्वेस्टमेंट माना जाता है। इसमें इन्वेस्ट करना भी एक तरह का शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट करना कहलाता है। आप SIP (Systematic Investment Plan) के साथ म्यूरल फण्ड में हर महीने 1000 रूपये की इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं।

क्या है SIP (Systematic Investment Plan):

हम यह कह सकते हैं कि SIP एक तरह से काम रिस्क में इंवेट करने का एक अच्छा और सरल तरीका है। जैसा कि नाम से पता चलता है, Systematic Investment Plan(व्यवस्थित निवेश योजना)म्यूचुअल फंडस । SIP द्वारा आप किसी भी एक निश्चित रकम को कम रिस्क में हर महीने जोड़ सकते हैं। इस तरह जोड़ने से आपको एक अच्छी रकम प्राप्त हो जाएगी। ऐसे लोग जिन्हें शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी नहीं होती, उनके लिए इन्वेस्ट करने का SIP सबसे अच्छा तरीका है। SIP में एक निश्चित राशि अपने निर्धारित शेयर अथवा म्यूचुअल फण्ड में इन्वेस्ट की जा सकती है। इसके अलावा इसमें Gold में भी इन्वेस्ट किया जाता है। इन्वेस्टमेंट का अंतर प्रति दिन, प्रति सप्ताह अथवा प्रति माह का भी रखा जा सकता है।

SIP में इन्वेस्टमेंट के फायदे:

SIP में इन्वेस्टमेंट करने पर आप छोटी से लेकर बड़ी रकम तक का इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं।

इस तरह के इन्वेस्टमेंट में आप लम्बे समय तक छोटी रकम इन्वेस्ट करके भी बड़ा रिटर्न प्राप्त कर सकते हो।

इसमें रिस्क बहुत कम होती है।

SIP में इन्वेस्टमेंट करना बहुत आसान होता है।

SIP में आप Gold द्वारा भी इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं।

Mutual Fund के प्रकार :

इक्विटी फंडस :

इक्विटी फंडस में इक्विटी शेयर्स में इन्वेस्ट किये जाते हैं इसमें इन्वेस्ट करना एक तरह का हाई रिस्क इन्वेस्टमेंट होता है, परन्तु इसमें इन्वेस्ट करने पर प्रॉफिट भी उतना ज्यादा ही होता है।

डेट पॉइंट्स :

डेट पॉइंट्स में रिस्क फेक्टर कम होता है लेकिन फायदा भी फिर कम ही होता है। इस तरह के इन्वेस्टमेंट में कुछ हिस्सा इक्विटी में लगाया जाता है और कुछ हिस्सा डेट पॉइंट्स में लगाया जाता है जिससे रिस्क और प्रॉफिट बैलेंस किया जा सके।

बैलेंस फण्ड :

अगर आपको मीडियम रिस्क पसंद है तो आपके लिए बैलेंस फण्ड का चुनाव सही रहेगा। इसके अंतर्गत 2 तरह के फण्ड आते हैं। ओपन एंड फण्ड और क्लोज एंड फण्ड

ओपन एंड फण्ड :

इस तरह के फण्ड में आप कभी भी खरीदी या बिक्री कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको प्रॉफिट न हो पाने की आशंका होती है तो आप अपना पैसा वापस ले सकते हैं।

क्लोज एंड फण्ड :

इस तरह के फण्ड में आपको मेच्योरटी तक रखना ही पड़ता है आप इसे कभी भी खरीद या बेच नहीं सकते हैं।

म्यूचुअल फंड्स खरीदने के तरीके:

ऑनलाइन:

म्यूचुअल फंड में ऑनलाइन इन्वेस्ट करना भी एक बहुत अच्छा तरीका है। इसके लिए आपको म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनी की साईट द्वारा ऑनलाइन इन्वेस्ट करना होगा। इसके लिए आपको अपना एक खाता और एक यूजर आईडी-पासवर्ड बनाना होगा। इसके बाद आप अपने पसंद से फण्ड का चुनाव करके, कितना फण्ड इन्वेस्ट करना है इसकी जानकारी दे कर अपने म्यूचुअल फंडों के प्रकार से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा एसेट मैनेजमेंट कंपनी में फ़ोन लगा कर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

ऑफलाइन :

आप Mutual Fund में ऑफलाइन भी इन्वेस्ट कर सकते हैं। ऑफलाइन इन्वेस्ट करने के लिए आप किसी वित्तीय मध्यस्थ की सेवा का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा आप एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यालय सीधे जाकर या रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट के ऑफिस जा कर भी म्यूचुअल फंड में ऑफलाइन इन्वेस्ट कर सकते हैं।

इन्वेस्ट करते समय इन बातों का रखे ध्यान:

Mutual Fund में थोड़ा रिस्क होता है।

इन्वेस्ट करने से पहले कंपनी की हिस्ट्री जरूर जाने और प्रोस्पेक्टस को ध्यान पूर्वक पढ़ें।

इन्वेस्ट करते समय टैक्स का ध्यान जरूर रखें।

आपके फण्ड को कौन मैनेज कर रहा है इस बात की सम्पूर्ण जानकारी अवश्य लें।

आप पहले प्रॉफिट और रिस्क फेक्टर की जानकारी लेना न भूलें।

Mutual Fund में इन्वेस्ट करने के लिए आपको डी-मेट अकाउंट की जरूरत नहीं होती है।

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यूके सिन्हा बने एएमएफआई के चेयरमैन

म्यूचुअल फंड उद्योगों के संगठन एएमएफआई ने यूके सिन्हा को अपना नया चेयरमैन नियुक्त किया है। सिन्हा यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हैं। एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंडस इन इंडिया.

यूके सिन्हा बने एएमएफआई के चेयरमैन

म्यूचुअल फंड उद्योगों के संगठन एएमएफआई ने यूके सिन्हा को अपना नया चेयरमैन नियुक्त किया है। सिन्हा यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हैं।

एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंडस इन इंडिया [एएमएफआई] ने एचडीएफसी एमएफ के प्रबंध निदेशक मिलिंद बारवे को उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। सिन्हा और बारवे अगली सालाना आम बैठक तक पद पर बने रहेंगे। सिन्हा ने एपी कुरियन का स्थान लिया है। कुरियन 1995 से एएमएफआई के गठन से इसके प्रमुख के पद पर थे।

बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक

शेयर बाजार की तेजी में रिलायंस का मिड-स्मॉलकैप फंड, L&T मिडकैप फंड, DSP म्यूचुअल फंडस बीआर स्मॉल-मिडकैप म्यूचुअल फंड ने पिछले एक महीने में 3% का निगेटिव रिटर्न दिया है।

Ankit Tyagi
Updated on: May 27, 2017 11:05 IST

बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक- India TV Hindi

बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक

नई दिल्ली। शेयर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन बाजार की इस तेजी में कई मिडकैप और स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स ऐसे है जो निगेटिव रिटर्न दे रहे है। खासकर रिलायंस का मिड-स्मॉलकैप फंड, L&T मिडकैप फंड, DSP बीआर स्मॉल-मिडकैप और सुंदरम सिलेक्ट मिडकैप ने पिछले एक महीने में 3 फीसदी का म्यूचुअल फंडस निगेटिव रिटर्न दिया है। ऐसे में सवाल उठता है, कि अब घरेलू निवेशकों को क्या करना चाहिए। इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल में आई गिरावट से घबराना चाहिए। GST लागू होने के बाद और अच्छे मानसून के चलते मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में फिर से तेजी लौटेगी। यह भी पढ़े: देश के अमीर भी अब लगा रहे म्युचूअल फंड में पैसा, आप भी छोटी रकम पर ऐसे पाएं मोटा मुनाफा

अब क्या करें निवेशक

वाइजइन्वेस्ट एडवाइजर के हेमंत रुस्तगी का कहना है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशको को घबराने की जरुरत नहीं है। इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करें। क्योंकि लंबी अवधि के निवेश पर उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। छोटी-मध्यम अवधि निवेश पर उतार-चढ़ाव का असर ज्यादा है जिसके चलते बाजार को नहीं बल्कि लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश करने की सलाह होगी। बाजार की इस तेजी में मौजूदा निवेशकों को निवेश पोर्टफोलियो को बैलेंस रखना जरूरी है। मिड और स्मॉलकैप में ज्यादा निवेश है तो पोर्टफोलियो को बैलेंस करें। मिड और स्मॉलकैप की जगह कुछ लार्जकैप और मल्टीकैप फंड्स को जोड़ सकते है। जिन निवेशकों का छोटी म्यूचुअल फंडस अवधि का नजरिया है उन्हें फंड के प्रदर्शन के आधार पर फंड ना चुनें। निवेश से पहले फंड के साथ जुड़े जोखिम को समझना बेहद जरुरी है।

ऐसे में आप भी अपना सकते है ये स्ट्रैटजी

1.एक फंड से दूसरे फंड में शिफ्ट होना जरूरी

2.अंडरपरफॉर्मर को पहचाने का तरीका

इन्वेस्टर्स की सबसे बड़ी मुश्किल होती है, पोर्टफोलियों में अंडरपरफॉर्मर को पहचाना। इसकी पहचान के लिए एक्सपर्ट कहते हैंं कि हर क्वार्टर में इन्वेस्टर्स को रिटर्न चेक करने चाहिए। अगर किसी फंड का रिटर्न बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले अच्छा रिटर्न दे रहा है और अगले दो क्वार्टर में भी इसकी परफॉर्मेंस इंडेक्स के बराबर ही रहने पर इन्वेस्टर्स को निवेशित रहना चाहिए। वहीं, अगर फंड्स अंडरपरफॉर्म करता है, तब फंड्स से बाहर निकलना सही होगा।#ModiGoverment3Saal: मोदी के कार्यकाल में निवेशक हुए मालामाल, ऐसे 5 हजार रुपए लगाकर कमाए 3 लाख

3.समय-समय पर फंड्स निकालना सही रणनीति

मान लीजिए इन निगेटिव फंड्स में आपने एक लाख रुपया लगाया होता तो पांच साल में आपकी रकम करीब 1.20 लाख रुपए हो जाती, जो कि एक औसत रिटर्न है। इस पर बजाज कैपिटल के सीईओ अनिल चोपड़ा कहते हैंं कि समय-समय पर फंड्स से रकम निकालनी चाहिए।

ऐसे चुने अच्छे फंडस

बाजार में हजारों म्‍यूचुअल फंड की स्‍कीम चल रही हैं। सभी दावा करती हैं कि वेे सबसे अलग हैं। यही कारण होता है कि निवेशक बिना सोचे समझे म्‍यूचुअल फंड का चयन कर लेता है, जोकि आगे चलकर समस्‍या बन जाता है। हम आपकी इस समस्‍या का हल यहां पर करेंगे। आप सिर्फ कुछ नियमों का पालन कर अच्‍छे म्‍यूचुअल फंड का चुनाव कर निवेश कर सकते हैं। म्‍यूचुअल फंड के चयन में चार बातों को ध्‍यान में रखना होता है- परफॉर्मेंस, रिस्‍क, मैनेजमेंट और कॉस्‍ट।#ModiGoverment3Saal: सोने से रूठी ‘लक्ष्मी’, जुलाई तक हो सकता है 1100 रुपए सस्ता

1.परफॉर्मेंस

जानकारों का कहना है कि आप सेब और संतरे की तुलना नहीं कर सकते, भले ही दोनों फल हैं। ठीक इसी प्रकार दो म्‍यूचुअल फंड की तुलना करना आसान नहीं होता। आप इक्विटी फंड की तुलना डेब्‍ट फंड से या इनकम फंड की ग्रोथ फंड से नहीं कर म्यूचुअल फंडस सकते। लिहाजा किसी भी म्‍यूचुअल फंड की तुलना करने से पहले उनके प्रारूप को ध्‍यान से देख लें। समान प्रारूप वाले फंड की ही तुलना की जा सकती है। अलग-अलग कंपनियों के समान प्रारूप के म्‍यूचुअल फंड की तुलना करते वक्‍त बाजार में उनकी परफॉर्मेंस देखें। जो बाजार में अच्‍छा चल रहा हो, उसी को चुने। लेकिन हां यहां भी आंख मूंद कर फैसला न करें। इसके रिस्‍क फैक्‍टर को ध्‍यान से पढ़ें।

2.रिस्‍क

लोगों के बीच यह धारणा है कि म्‍यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश होता है, जिसमें जितना रिस्‍क लेंगे, उतना ज्‍यादा रिटर्न (धन) आपको मिलेगा। यह धारणा बिलकुल गलत है। कोई भी म्‍यूचुअल फंड इस स्ट्रैटजी पर काम नहीं करता है। बेहतर होगा यदि आप कम रिस्‍क वाले ही म्‍यूचुअल फंड लें, ताकि म्यूचुअल फंडस धीरे-धीरे अच्‍छी मात्रा में रिटर्न मिल सके। इसका आंकलन करने के लिए समान श्रेणी के दो म्‍यूचुअल फंड की तुलना करें वो भी उस समय में जब बाजार में तेजी से उछाल आया हो या गिरावट आयी हो। उससे आप आसानी से दोनों में बेहतर चुन सकते हैं। दोनों के रिटर्न की तुलना करके आप म्‍यूचुअल फंड को चुन सकते हैं।एक साल में बैंकिंग म्यूचुअल फंड्स में मिले 60% के बड़े रिटर्न, आपके पास भी है मौका

3.मैनेजमेंट

म्‍यूचुअल फंड बाजार जैसे- शॉर्ट टर्म, इनकम फंड, इंडेक्‍स फंड, आदि। इनमें कई ऐसे होते हैं जो मैनेजर पर निर्भर नहीं करते। सभी के परिणाम लगभग समान होते हैं। हां इक्विटी फंड में फंड मैनेजमेंट काफी महत्‍वपूर्ण होता है। आपकी जरा सी चूक आपको घाटा पहुंचा सकती है। इस फंड में तभी पैसा लगाये, जब आप इसके अच्‍छे जानकार हों। रिस्‍क लेने से पैसा डूब सकता है।ऑप्टिमा मनी मैनेजर के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज मठपाल का कहना है कि फंड म्यूचुअल फंडस मैनेजर निवेश की रणनीति तय करता है जो सेक्टर और शेयर का चुनाव करते है। निवेश से पहले फंड मैनेजर का प्रदर्शन देखना चाहिए। हर एक फंड मैनेजर का निवेश का तरीका अलग होता है। मैनेजर बदलने के बाद जल्दबाजी में फंड से निकलना ठीक नहीं है। म्यूचुअल फंड्स के इन फेवरेट शेयरों ने दिया 900% तक का रिटर्न, आपके पास भी है मौका

4.कॉस्‍ट

अंतिम तथ्‍य होता है कॉस्‍ट यानी कीमत। इस बात को हमेशा ध्‍यान रखें कि म्‍यूचुअल फंड कोई नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन या चैरिटी नहीं है। हर कंपनी अपना नफा-नुकसान सोच कर आगे बढ़ती है। म्‍यूचुअल फंड में निवेश करते वक्‍त आपको तमाम तरह के हिडेन चार्ज होते हैं। उनके बारे में पता लगाने के लिए फंड की टर्म एंड कंडीशन जरूर पढ़ें। म्‍यूचुअल फंड में निवेश करने वाला मूल धन ब्‍याज के साथ एक निश्चित समय-अंतराल पर बढ़ता या घटता है। उस समय अंतराल का और दरों का हमेशा हिसाब अपनी डायरी में रखें।

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