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भारतीय रिजर्व बैंक की डिजिटल करेंसी

(प्रारंभिक परीक्षा के लिए - डिजिटल करेंसी, क्रिप्टोकरेंसी, फिएट मुद्रा)
(मुख्य परीक्षा के लिए, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र:2 - सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

डिजिटल करेंसी/मुद्रा क्या है, निबंध, फायदे, नुकसान (Digital Currency in Hindi)

डिजिटल क्षेत्र में आज भारत किसी भी देश से कम नहीं। 2015 का वह साल था जब भारत ने पहली बार डिजिटल इंडिया कैंपेन की शुरुआत की थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनाने वाले तब और अब के भारत में काफी अच्छा बदलाव देखने को मिला है। 2015 से लेकर 2022 तक के सफर में भारत ने डिजिटल प्लेटफार्म में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है। शॉपिंग, बिल भरने से लेकर बिजनेस करने तक, भारत डिजिटल बन चुका है। पिछले कुछ सालों में भारत डिजिटली बहुत प्रगति कर चुका है। ऐसे बहुत सारे स्कीम्स डिजिटल हो चुके हैं जैसे BHIM UPI, DIGI LOCKER, CoWIN, Aadhar, GEMS इत्यादि। इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने भारत के नागरिकों के कामों को काफी आसान कर दिया है। अब भारत बैंकिंग के क्षेत्र में भी एक बहुत बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। यह बदलाव भारत की सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर डिजिटल करेंसी यानी डिजिटल मुद्रा को लाकर करना चाहती है। तो क्या है डिजिटल करेंसी और यह किस तरह भारत के लोगों के पैसों को एक डिजिटल प्लेटफार्म में बदल देगी? यह आर्टिकल आपको डिजिटल करेंसी/मुद्रा से जुड़ी सभी जानकारी देगा।

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Table of Contents

डिजिटल करेंसी/मुद्रा क्या है (What is Digital Currency)

जब किसी देश के नगदी रुपयों को डिजिटल सिस्टम में स्टोर किया जाता है और उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है उसे हम डिजिटल करेंसी कहते हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे आप ही के पैसों का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप जैसे आपके पैसों या किसी भी एसिड का इलेक्ट्रॉनिक टोकन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म में इस्तेमाल किया जाने वाला। डिजिटल मुद्रा देश के नागरिकों और बैंकिंग सेक्टर ओं को ऐसा मौका देगा जिससे पैसों को लेकर सब कुछ इलेक्ट्रॉनिक होता हुआ नजर आएगा जैसे बैंकों में लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ेगी और बस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर मिनटों में ही उनका पैसा स्टार्ट हो जाएगा या फिर वह कुछ ही मिनटों में अपना पैसा कहीं पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे।

डिजिटल करेंसी एवं रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (Digital Currency RBI)

भारत की फाइनेंस मिनिस्टर के नेतृत्व में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की बैठक हुई जिसमें डिजिटल करेंसी के ऊपर चर्चा की गई थी। चर्चा में भारत सरकार ने सेंट्रल बैंक से डिजिटल करंसी की शुरुआत करने की बात रखी। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने सेंट्रल बैंक को डिजिटल करंसी लाने का सुझाव दिया जिससे लोग पैसों को डिजिटली इस्तेमाल कर सकें। भारतीयों का क्रिप्टो करेंसी के तरफ बहुत ज्यादा झुकाव को लेकर सरकार ने यह तय किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक ऐसा तरीका लेकर आए जिससे भारत के लोग अपने पैसों को डिजिटली इस्तेमाल कर सकें और डीजिटली कमा सकें। एक ऐसा तरीका जिससे लोगों का समय भी बच्चे और उनका पैसा सलामत भी रहे और साथ ही साथ यह देश डिजिटल उपकरणों को लेकर स्मार्ट बनें। ‌

विदेशों में डिजिटल करेंसी की लहर (Digital Currency in Abroad)

पूरे विश्व में 86% सेंट्रल बैंक ऐसे हैं जैसे ब्रिटेन की बैंक, चाइना की बैंक, अमेरिका की बैंक जो अपने कन्वेंशनल पैसों को बदलना चाह रही हैं यानी उन्हें बदलकर इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल बनाना चाह रही हैं। इस विषय पर कितने प्रतिशत देश काफी चर्चा कर रही है और इस पर काफी खोजबीन भी कर रही है।आपको बता दें कि पूरे विश्व में अब तक 14% सेंट्रल बैंक ने तो पायलट प्रोजेक्ट्स भी शुरू कर दिया है। उन देशों के सेंट्रल बैंक ने डिजिटल करेंसी पर अपना काम करना भी शुरू कर दिया है।

यह तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी नई चीज के आने से जितना उस चीज का फायदा होता है उतना ही वह अपने साथ कुछ नुकसान भी लेकर आती है। ठीक उसी तरह यदि डिजिटल करेंसी देश के लिए काफी अच्छा बदलाव साबित होगी तो वह अपने साथ कुछ नुकसान भी लेकर आएगी जैसे यह डिजिटल मुद्रा के कुछ नुकसान हो सकते हैं:

  • डिजिटल करेंसी के आने से बैंकों में कर्मचारियों को काफी नुकसान हो सकता है क्योंकि इस मुद्रा के आने से बैंकों को मैन पावर कम चाहिए होगी
  • ऐसा हो सकता है कि कितने ही सारे बैंकों का कारोबार कम हो जाएगा क्योंकि सब कुछ इलेक्ट्रॉनिक रूप से होगा और पैसा भी इलेक्ट्रॉनिक ही बन जाएगा
  • इससे बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाले लोगों के बीच अपनी जॉब को लेकर सुरक्षा महसूस होने में कमी हो सकती है
  • डिजिटल करेंसी के आने से देश के कई बैंकों को अपना मैन पावर कम करना पड़ सकता है
  • बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों की नौकरी चले जाने की सिक्योरिटी पर सवाल उठ सकते हैं

डिजिटल करेंसी के प्रकार (Digital Currency Types)

डिजिटल करेंसी के तीन प्रकार हो सकते हैं जैसे:

  • सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी
  • वर्चुअल करेंसी
  • क्रिप्टो करेंसी

डिजिटल करेंसी से संबंधित लेटेस्ट न्यूज़ (Digital Currency Latest News)

2022 का यूनियन बजट संसद में 1 फरवरी, 2022 को पेश किया गया। भारत की वित्त मंत्री ‘निर्मला सीतारमण’ ने बजट के दौरान करेंसी से लाभ यह एलान किया कि वर्ष 2022-2023 में डिजिटल करेंसी की शुरुआत होगी। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि जो भारतीय क्रिप्टो करेंसी में निवेश कर रहे हैं उन्हें 30 फ़ीसदी टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा। भारत सरकार आरबीआई यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ डिजिटल करेंसी को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। बजट सेशन के दौरान वित्त मंत्री ने अपनी बात रखी कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करंसी भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। इससे भारत एक सस्ते एवं कुशल करेंसी सिस्टम की ओर बढ़ेगा।

डिजिटल करेंसी का उपयोग कैसे करें (How to Use)

माना जा रहा है कि भारत में लाई जाने वाली डिजिटल करेंसी दुनियाभर में प्रचलित क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की तरह ही उपयोग की जाएगी। इसमें फर्क सिर्फ इतना होगा कि डिजिटल करेंसी सरकारी करेंसी होगी। इस पर सरकारी यानी कानून का मोहर होगा। डिजिटल करेंसी को कैसे उपयोग करें, इसकी गाइडलाइंस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी की जाएगी। डिजिटल करेंसी को ब्लॉकचेन और अन्य टेक्नोलॉजी की मदद से इंट्रोड्यूस किया जाएगा जिसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जारी करेगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

आने वाले समय में डिजिटल करेंसी को भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2022-2023 डिजिटल करेंसी के आगमन का समय बताया जा रहा है। यदि भारत सरकार के डिजिटल करेंसी लॉन्च का फैसला अच्छा साबित हुआ तो यह भारत के डिजिटल क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के लिए सही साबित हो सकता है। नई नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से यह भारत के लोगों और सरकार को स्मार्ट नागरिक बनने की ओर जागरूक करता हुआ दिख रहा है। यह भारत की करेंसी को एक सस्ते और कुशल करंसी सिस्टम की ओर ले जाता हुआ साबित हो सकता है।

RBI Digital Currency: ई-रुपया के क्या हैं फायदें और क्या है RBI का प्लान, जानिए

E-Rupee: भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि वह जल्द विशेष उपयोग के लिए E-Rupee को पायलट बेस पर लॉन्च करेगा

RBI Digital Currency: ई-रुपया के क्या हैं फायदें और क्या है RBI का प्लान, जानिए

भारतीय रिजर्व बैंक। (फोटो सोर्स: File/ANI)

(Story By- Hitesh Vyas)

E-Rupee: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार (7 अक्टूबर) को घोषणा की कि डिजिटल ई-रुपए (E-Rupee) का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च जल्द ही शुरू किया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने डिजिटल रुपए पर चर्चा करने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पर एक कॉन्सेप्ट नोट जारी किया है।

यह कॉन्सेप्ट नोट लोगों में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से जारी किया गया है, ताकि डिजिटल करेंसी के सही तरीके के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके। इसके साथ ही आरबीआई ने भारतीय रुपए के समानांतर E-Rupee के पायलट लॉन्च की बात कही है। आरबीआई की ओर से ई-रुपए की लॉन्चिंग को लेकर तैयार किए जा रहे प्लान के बारे में बताया गया। बैंक की ओर से जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक ई-रुपए को पायलट लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है।

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चार सरकारी बैंकों में शुरु होगा पायलट प्रोजेक्ट: आरबीआई ने ई-रुपए के उपयोग के लिए दो व्यापक श्रेणियों – खुदरा (Retail) और थोक (Wholesalr) के बारे में संकेत दिया है। कॉन्सेप्ट नोट में डिजिटल करेंसी की प्रौद्योगिकी और डिजाइन विकल्प, डिजिटल रुपए के इस्तेमाल और डिजिटल मुद्रा को जारी करने की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही इसमें सीबीडीसी की शुरूआत के चलते बैंकिंग प्रणाली, मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की गई है। इसमें गोपनीयता के मुद्दों का विश्लेषण भी किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के लिए देश के चार सरकारी बैंकों भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा को शामिल किया है।

क्या है आरबीआई की योजना: केंद्रीय बैंक ने कहा कि सीबीडीसी का विकास पब्लिक को एक रिस्क फ्री वर्चुअल करेंसी प्रदान करना है जो उन्हें प्राइवेट वर्चुअल करेंसी में लेनदेन के जोखिम के बिना लाभ देगा। सीबीडीसी जारी करने के पीछे दो दृष्टिकोण हैं- एक डिजिटल रुपया बनाना जो एक पेपर करेंसी के जैसा हो और दूसरा एक सहज तरीके से डिजिटल रुपए को पेश करने की प्रक्रिया को मैनेज करना।

ई-रुपए के प्रकार: कॉन्सेप्ट नोट के मुताबिक डिजिटल रुपए के इस्तेमाल और काम के आधार पर सीबीडीसी को दो व्यापक श्रेणियों – सामान्य उद्देश्य (खुदरा) (CBDC-R) और थोक (CBDC-W) में विभाजित किया जा सकता है। खुदरा सीबीडीसी मुख्य रूप से खुदरा लेनदेन के लिए नकदी का एक इलेक्ट्रॉनिक संस्करण है। यह संभावित रूप से सभी – निजी क्षेत्र, गैर-वित्तीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों के उपयोग के लिए उपलब्ध होगा। वहीं, थोक सीबीडीसी को चुनिंदा वित्तीय संस्थानों तक सीमित पहुंच के लिए डिजाइन किया गया है।

डिजिटल करेंसी के फायदे: डिजिटल करेंसी आने के बाद कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह मोबाइल वॉलेट की तरह काम करेगी। इसे रखने पर ब्याज भी मिलेगा। डिजिटल करेंसी को मोबाइल वॉलेट या अकाउंट में रखा जा सकता है। साथ ही इसके इस्तेमाल से पेपर करेंसी के उपतोग में भी कमी आएगी। CBDC को बिना इंटरनेट के भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

टोकन-आधारित और खाता-आधारित डिजाइन: केंद्रीय बैंक का कहना है कि ई-रुपए या सीबीडीसी को टोकन-आधारित या खाता-आधारित के रूप में डिजाइन किया जा सकता है। टोकन-आधारित सीबीडीसी में, टोकन प्राप्त करने वाला व्यक्ति यह सत्यापित करेगा कि टोकन का स्वामित्व वास्तविक है। वहीं, खाता-आधारित प्रणाली में करेंसी से लाभ सीबीडीसी के सभी धारकों के शेष और लेनदेन के रिकॉर्ड के रखरखाव की जरूरत होगी।

आरबीआई के मुताबिक, सीबीडीसी जारी करने और मैनेजमेंट के लिए दो मॉडल हैं – प्रत्यक्ष मॉडल (एकल स्तरीय मॉडल) और अप्रत्यक्ष मॉडल (दो स्तरीय मॉडल)। प्रत्यक्ष मॉडल में, केंद्रीय बैंक डिजिटल रुपया प्रणाली के सभी पहलुओं के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगा। वहीं, अप्रत्यक्ष मॉडल वह होगा जहां केंद्रीय बैंक और अन्य मध्यस्थ प्रत्येक अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।

Explained: Pilot Project क्या है, RBI ने क्यों लॉन्च किया E-Rupee, Digital करेंसी से फायदा क्या?

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अब लोगों के शॉपिंग का तरीका, यात्रा का तरीका, काम करने का तरीका सब डिजिटल होता जा रहा है. वस्तुओं के लेनदेन के तरीके में भी लगातार बदलाव हो रहा है. इसी क्रम में एक नवंबर को RBI ने अपनी डिजिटल करेंसी 'डिजिटल रुपया' को लॉन्च कर दिया है. जानकारी के मुताबिक ये डिजिटल रुपया (E-Rupee) होलसेल ट्रांजेक्शन के लिए जारी किया है. फिलहाल इसे 'पायलट प्रोजेक्ट' का नाम करेंसी से लाभ दिया गया है.

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पहले समझिए क्या है Digital Rupee?

Digital Rupee, CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी द्वारा जारी की गई एक नई वैध मुद्रा है. आसान भाषा में कहें तो, डिजिटल करेंसी आरबीआई द्वारा डिजिटल फॉर्म में जारी करेंसी नोट्स हैं. भारत में डिजिटल करेंसी दो तरह की होगी. शुरुआत में इसका इस्तेमाल सरकारी काम में secondary market के लेन-देन निपटाने के लिए होगा. दरअसल, अधिकांश व्यापार इसी मार्केट में किया जाता है. बता दें, Secondary Market में Equity Market और Loan Market शामिल हैं. केंद्र सरकार ने बीते एक फरवरी, 2022 को वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में डिजिटल रुपया लाने की घोषणा की थी.

अब जानते हैं Pilot Project क्या है?

'पायलट प्रोजेक्ट' के जरिए विशिष्ट उपयोग के लिए 'डिजिटल रुपया' लांच किया गया है. इसके जरिए सरकारी सिक्योरिटीज में सेकेंडरी मार्केट लेनदेन को निपटाया जाएगा. RBI ने ‘केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा’ लाने की अपनी योजना के तहत डिजिटल रुपये का 'पायलट टेस्टिंग' शुरू करने का फैसला किया है. RBI एक रिपोर्ट में पहले भी कह चुकी है कि 'डिजिटल मुद्रा' लाने का मकसद मुद्रा के मौजूदा स्वरूपों का सरल बनाना है. इससे यूजर्स को मौजूदा भुगतान व्यवस्था के साथ अतिरिक्त भुगतान विकल्प मिल पाएंगे और वो अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुन पाएगा और उसका लाभ ले सकेगा.

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Central Bank Digital Currency से फायदा क्या?

1. डिजिटल करेंसी (E-Rupee) आने के बाद आपको अपने पास कैश रखने की जरूरत नहीं होगी.

2. अब सरकार के साथ आम लोगों और बिजनेस के लिए लेनदेन की लागत कम हो जाएगी.

3. CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी द्वारा मोबाइल वॉलेट की तरह सेकंडों में बिना इंटरनेट के ट्रांजैक्शन हो सकता है.

4. अब चेक, बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन की समस्या न के बराबर हो सकती है.

5. नकली करेंसी की समस्या भी खत्म हो सकती है.

6. नोट की प्रिंटिंग का खर्च भी बचेगा

7. एक डिजिटल मुद्रा की आयु physics नोटों की तुलना में ज्यादा होगी.

8. इसे जलाया या फाड़ा नहीं जा सकता है.

9. एक सबसे बड़ी बात बिटकॉइन जैसी अन्य आभासी मुद्राओं से जुड़े जोखिम को कम किया जा सकता है.

क्रिप्टोकरेंसी और 'डिजिटल रुपी' में अंतर क्या?

क्रिप्टोकरेंसी को कोई मॉनिटर नहीं करता. यह पूरी तरह से प्राइवेट है. इस पर किसी सरकार या सेंट्रल बैंक का कंट्रोल नहीं होता है. लेकिन, RBI की डिजिटल पर सरकार की सहमती होगी. 'डिजिटल रुपी' को फिजिकल में बदला जा सकता है. क्रिप्टोकरेंसी घटता-बढ़ता रहता है, लेकिन डिजिटल रुपी में ऐसा कुछ नहीं होता.

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सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) क्या है?

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी सरल शब्दो में कहें तो CBDC किसी केंद्रीय बैंक की तरफ से उनकी मौद्रिक नीति के अनुरूप नोटों का डिजिटल स्वरूप है. इसमें नोट छापने की जगह इलेक्ट्रॉनिक टोकन या खाते जारी किए जाते हैं. सीबीडीसी, दुनिया भर में, वैचारिक, विकास या प्रायोगिक चरणों में है, देखना होगा इसका भविष्य क्या होगा. फिलहाल भारत में यह दो तरह की होगी.

1. Retail (CBDC-R): बताया जा रहा है कि यह सभी के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी.

2. Wholesale (CBDC-W): इसे सिर्फ चुनिंदा फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए बनाया गया है.

Pilot Project में कौन-कौन से बैंक शामिल है?

डिजिटल करेंसी के पायलट प्रोजेक्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचएसबीसी बैंक का नाम हैं. ये बैंक सरकारी सिक्योरिटीज में लेनदेन के लिए इस डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करेंगे, जिसे CBDC का नाम दिया गया है. यह भारत की पहली डिजिटल करेंसी बताई जा रही है.

Reserve Bank of India

Reuters

डिजिटलीकरण से अर्थव्यवस्था को क्या फायदा?

जानकारों की मानें तो डिजिटलीकरण एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन साबित हो सकता है. ट्रांजेक्शन कॉस्ट घटने के अलावा CBDC की सबसे खास बात है कि RBI का रेगुलेशन होगा जिससे मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग, फ्रॉड पर कंट्रोल किया जा सकता है. डिजिटल करेंसी से सरकार की अपने नेटवर्क के अंदर होने वाले ट्रांजेक्शंस तक पहुंच हो पाएगी. सरकार को भविष्य के लिए बजट और आर्थिक योजना बनाने में सहायता मिलेगी. साथ ही पैसे पर सरकार का नियंत्रण होगा. उम्मीद है भारत में लांच किए गए डिजिटल रुपया का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे.

Crypto Currency क्या है - इसके फायदे और नुकसान क्या है?

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आखिरकार Crypto Currency क्या है? क्यों आज के समय में क्रिप्टो करेंसी कि हर तरफ चर्चाएं हो रही है। आज लोग क्यों इस करेंसी में निवेश करना चाहते हैं। क्या सभी देश ने करेंसी से लाभ अपने यहां इसे कानूनी तौर पर वैध कर दिया है या अब भी कुछ देश ऐसे है जिसने cryptocurrency को कानूनी तौर पर illegal करार देते हुए अपने यहां बैन कर दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत में crypto currency में ट्रेड या निवेश करना legal है या illegal है। आज इस लेख में हम विस्तार से आपको crypto currency के बारे बताएगे।

Crypto Currency क्या है?

Crypto Currency कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी एक Digital या Virtual Currency है। यानी कि फिजिकली इसका कोई अस्तित्व नहीं है। यह एक ऐसी करेंसी है जिसे किसी भी संस्था या सरकार के द्वारा नहीं संचालित नहीं किया गया है। इस करेंसी का आज तक कोई मालिक नहीं पता चला है। इसलिए यह एक decentralised currency है। एक डिजिटल करेंसी होने के कारण इसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। इस करेंसी का प्रयोग किसी भी वस्तु या सर्विस का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है और वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल सिग्नेचर लिए जाते हैं।

इस करेंसी का कोई मालिक ना होने के कारण पहले इसे अवैध करार दिया गया था। लेकिन बिटकॉइन के इतने पॉपुलर होने के बाद कुछ देशों ने इसे legal कर दिया है। लेकिन आज करेंसी से लाभ भी ज्यादातर देश की सरकारों ने क्रिप्टोकरंसी को अपने देश में illegal कहां है।

Crypto currency कि Value

क्रिप्टो करेंसी की कोई भी फिजिकल अपीयरेंस ना होने के बावजूद भी आज इसकी वैल्यू बहुत अधिक है। शुरुआत में तो क्रिप्टो करेंसी की वैल्यू बहुत कम थी। लेकिन धीरे धीरे इसकी वैल्यू बढ़ती गई और आज यह बहुत ही प्रचलित करेंसी बन गई है। आज इसकी वैल्यू रुपया, डॉलर, यूरो इत्यादि अलग-अलग देशों की करेंसी से भी कई गुना हो गई है। आप इस करेंसी की मदद से किसी सामान का लेन देन या इसमें ट्रेडिंग और निवेश भी कर सकते हैं। ट्रेड करने के लिए आपको technical analysis आना जरूरी है नहीं तो बिना ज्ञान के भारी नुकसान झेलना पड़ करेंसी से लाभ सकता है।

Crypto Currency कैसे काम करती है?

क्रिप्टोकरेंसी निम्लिखित रूप से कार्य करती हैं:-

Crypto Currency का मुख्य कार्य, ब्लॉकचैन के माध्यम से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में पैसे ट्रांसफर करना होता है। ब्लॉकचैन का कार्य बैंक की तरह होता है। सभी लेनदेन का रिकॉर्ड ब्लॉक चैन में होने के कारण धोखाधड़ी की संभावना काफी कम होती है।

पावरफुल कंप्यूटर्स के माध्यम से कुछ लोग क्रिप्टो करेंसी मे धोखाधड़ी ना हो इसके लिए निगरानी और जांच करते हैं। इसी प्रोसेस को क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग प्रोसेस कहा जाता है। जांच और निगरानी करने वाले लोगों को माइनर्स का जाता है। जांच और निगरानी करने के लिए एक कोड मिलता है। जिसे स्क्रीन पर आने वाले गणित के सवाल को सही हल करने के बाद प्राप्त किया जाता है। इस स्टेप के बाद Crypto Currency की माइनिंग प्रोसेस कंप्लीट मान लिया जाता है।

अब क्रिप्टो करेंसी में भी बैंक की तरह के एक्सचेंज की जरूरत पड़ती है जिसके माध्यम से transaction को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जा सके। क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से खरीदारी या बिक्री करने के लिए एक वॉलेट होता है जिसमें यह करेंसी स्टोर रहती है।

टॉप Crypto Currency कौन सी है?

1) Bitcoin (BTC) :-

Bitcoin दुनिया में सबसे पहले क्रीपटोकरंसी के रूप में आयी है। यह सबसे पॉपुलर और सफल Crypto Currency है। जिसे साल 2009 में सतोशी नाकामोटो के द्वारा निर्माण किया गया था। हालाकि इससे पहले भी वर्चुअल करेंसी को लॉन्च करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बिटकॉइन को भी बनाने में काफी कढ़ी मेहनत करनी पड़ी थी लेकिन आज वही बिटकॉइन जिसको पहले कोई नहीं जानता था। शुरू में $5 में एक बिटकॉइन की कीमत थी। आज $64000 के पार चली गई है। यानी कि अगर रुपयों में बात करे तो 1 बिटकॉइन की कीमत आज ₹46 लाख के पार पहुंच गई है। इससे आप इसके इंपॉर्टेंस को समझ सकते है। लेकिन सबसे बढ़ी करेंसी से लाभ बात यह है कि cryptocurrency में निवेश बहुत सोच समझ के किया जाता है। हर दिन इसकी कीमत में भारी fluctuation होता रहता है।

2.Ethereum (ETH) :-

Bitcoin के जैसे ही Ethereum भी decentralized Crypto Currency है। Vitalik Buterin के करेंसी से लाभ द्वारा Ethereum Crypto Currency बनाई गई थी। इसके टोकन को Ether के नाम से भी कहा जाता है। इसका plateform यूजर्स को वर्चुअल टोकन बनाने में मददगार साबित होता है। जिसे blockchain-based computing platform कहा जाता है। इसकी मदद से बिटकॉइन के जैसे ही currency के तौर प्रयोग कर सकते हैं। Bitcoin के बाद Etheremum सबसे पॉपुलर Crypto Currency है। आज लगभग Ethereum $4200 कि उचाई तक पहुंच गया है। लेकिन शरुआत में इसकी क़ीमत सिर्फ $2 कि थी।

3. Litecoin (LTC) :-

Litecoin को एक गूगल के employee Charles Lee ने साल 2011 ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के तौर पर रिलीज़ किया है। हालांकि अब गूगल के employee नहीं है। यह भी Bitcoin और Ethereum कि तरह decentralised cryptocurrency हैं। करेंसी से लाभ Bitcoin के मुकाबले इसकी blockchain 4 गुना कम है। हालांकि Litecoin के जयदातार फंक्शन्स बिटक्वॉइन से मिलते जुलते है। माइनिंग कि प्रक्रिया करने के लिए Scrypt algorithm का प्रयोग किया जाता है। यह बिटक्वॉइन से जायदा प्रचलित करेंसी नहीं है। Litecoin कि शुरू में कीमत सिर्फ $28 के आस पास थी। लेकिन आज इसकी कीमत तकरीबन $409 तक पहुंच गई है। लेकिन बिटक्वॉइन के मुकाबले बहुत कम है।

इनके अलावा कुछ अन्य टॉप Crypto Currency
Dogecoin (Doge)
Dash (DASH)
Peercoin (PPC)
Monero (XMR)
Faircoin (FAIR)
Ripple (XRP)

क्रिप्टो करेंसी के क्या लाभ है? Benefits Of Cryptocurrency

4. Crypto Currency में लेने देन बहुत कड़ी निगरानी और सुरक्षा में होता है। यह सामान्य लेन देन से बिल्कुल भिन्न है।

क्रिप्टो करेंसी के क्या नुकसान है? Disadvantages of Crypto Currency

1. Cryptocurrency में रिवर्स का ऑप्शन नहीं होने के कारण किसी भी ट्रांजैक्शन को वापस नहीं किया जा सकता है। अगर गलत ट्रांजैक्शन हो जाता है तो आप को भारी नुकसान हो सकता है।

3. क्रिप्टो करेंसी किसी भी देश की सरकार या संस्था या किसी मालिक के द्वारा संचालित नहीं की जाती है। यह बहुत बड़ा disadvantage है।

6. क्रिप्टो करेंसी में मार्केट बहुत flexible होती है। इसलिए इसमें इन्वेस्ट करना बहुत ही रिस्की होता है।

7. Cryptocurrency का ड्रग्स सप्लाई, कालाबाजारी इत्यादि जैसे गलत काम के लिए ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

देश जहां Crypto Currency कानूनन वैध या अवैध है

Crypto Currency को legal कहने वाले देश:-

  • संयुक्त राज्य अमेरिका
  • कनाडा
  • ऑस्ट्रेलिया
  • यूरोपीय संघ
  • यूनाइटेड किंगडम
  • फिनलैंड

Crypto Currency को illegal कहने वाले देश:-

  • रूस
  • चीन
  • बोलीविया, कोलंबिया और इक्वाडोर
  • वियतनाम

भारत में Crypto Currency Legal या Illegal ?

क्या बिटकॉइन इंडिया में बैन है?

दोस्तों इसका सवाल सभी के मन में घूम रहा होगा कि क्या भारत में क्रिप्टो करेंसी कानूनी रूप से legal है या illegal है। इसके लिए हम आपको साल 2018 की एक न्यूज़ बताता हूं जब बिटकॉइन बहुत ही चर्चा में आया था। ऐसे ही भारत में भी बिटकॉइन के बहुत ही चर्चाएं होने लगी थी। इसी को देखते हुए साल 2018 में भारतीय रिजर्व बैंक ने क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगा दिया था। प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2019 (Banning of Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2019) के ड्राफ्ट में क्रिप्टो करेंसी में ट्रेड या निवेश करने वालों के लिए सजा का प्रस्ताव रखा गया था।

ड्राफ्ट में वर्चुअल करेंसी की खरीदारी या बिक्री करने वाले लोग, तैयार करने वाले लोग, वॉलेट में वर्चुअल करेंसी को रखने वाले लोग या क्रिप्टो करेंसी के द्वारा किसी भी तरह की डील करने वाले लोगों को दोषी पाए जाने पर 10 साल जेल की सजा का प्रस्ताव रखा गया था।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जब इसकी सुनवाई चली तो सर्वोच्च अदालत ने मार्च 2020 में क्रिप्टो करेंसी के लिए एक आदेश जारी किया। अपने आदेश में कहा कि वर्चुअल करेंसी या क्रिप्टो करेंसी का कानूनी रूप से लेनदेन किया जा सकता है।

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