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एक्सटीबी

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एशिया में एक्सबीबी का प्रकोप अधिक नजर आता है। ओएनएस के आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन में एक्सबीबी से संक्रमण के 0.7 प्रतिशत मामले सामने आए हैं। सिंगापुर में हाल ही में संक्रमण के जितने मामले सामने आए थे, उनमें से 58 प्रतिशत एक्सबीबी स्वरूप के थे। लेकिन एक ओर जहां दुनिया भर में एक्सबीबी मामलों में वृद्धि देखी जा रही है तो दूसरी ओर सिंगापुर में इसके मामले कम होने लगे हैं। वैज्ञानिक उन विभिन्न क्षेत्रों पर करीब से नजर रख रहे हैं जहां ये दोनों वेरिएंट पाए जा रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि कहां इनके ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
एस जयशंकर ने कंबोडिया में अमेरिकी विदेश मंत्री से की मुलाकात, ट्वीट कर कहा- अच्छी बैठक हुई
बीक्यू.1 और एक्सबीबी के बीच क्या अंतर है?
स्पाइक प्रोटीन (वायरस की सतह पर एक प्रोटीन, जो इसे हमारी कोशिकाओं में जाने देता है) के ‘रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन’ में कई साझा उत्परिवर्तन होने के कारण ओमीक्रोन स्वरूप सफल होते हैं। रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) वायरस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो स्पाइक प्रोटीन पर स्थिति होता है। स्पाइक प्रोटीन आरबीडी को शरीर के रिसेप्टर में जाने देता है, जिसके बाद यह कोशिकाओं में जाकर एक्सटीबी संक्रमण फैलाता है।

ओमिक्रॉन एक्सबीबी से संक्रमित भारतीयों में हल्के लक्षण

- भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ ने दावा किया - सार्स-सीओवी-2 वायरस लगातार अन्य स्वरूपों.

ओमिक्रॉन एक्सबीबी से संक्रमित भारतीयों में हल्के लक्षण

- भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ ने दावा किया

- सार्स-सीओवी-2 वायरस लगातार अन्य स्वरूपों में में हो रहा है उत्परिवर्तित

नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ (इन्साकॉग) ने कहा कि कोरोना के ओमिक्रॉन उप-स्वरूप (सब वेरिएंट) एक्सबीबी से संक्रमित भारतीय रोगियों में हल्के लक्षण हैं। उनमें गंभीर समस्या भी नहीं देखी गई है। विशेषज्ञों के समूह इन्साकॉग ने कहा कि देश में अनेक राज्यों में मरीजों में एक्सबीबी स्वरूप के संक्रमण का पता चला है, लेकिन इन्साकॉग एक्सबीबी और एक्सबीबी.1 की उत्पत्ति, विकास और अन्य किसी नए सब वेरिएंट पर नजर रख रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, इन्साकॉग ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। त्योहारों के कारण कोरोना वायरस संबंधित उचित व्यवहार अपनाने की सिफारिश की जाती है। महामारी के मौजूदा चरण में सार्स-सीओवी-2 वायरस लगातार अन्य स्वरूपों में उत्परिवर्तित हो रहा है, जिनमें से कुछ अधिक संक्रमण क्षमता वाले हो सकते हैं और वे रोग प्रतिरोधक क्षमता से बचकर निकल सकते हैं।

ओमीक्रोन के दो स्वरूपों के बारे में हम क्या जानते हैं, जिन्हें कहा जा रहा है ‘चचेरे भाई’

Britain Omicron: ब्रिटेन में कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन वेरिएंट के दो नए स्वरूपों के बारे में पता चला है। हालांकि इन्हें चिंताजनक स्वरूप नहीं माना जा रहा है। इन्हें बीक्यू.1 और एक्सबीबी नाम दिया गया है। सिंगापुर के आंकड़ों के आधार पर, एक्सबीबी में बीए.5 की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 30 प्रतिशत कम होने का अनुमान लगाया गया है।

corona (1)

सांकेतिक फोटो।

एशिया में एक्सबीबी का प्रकोप अधिक नजर आता है। ओएनएस के आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन में एक्सबीबी से संक्रमण के 0.7 प्रतिशत मामले सामने आए हैं। सिंगापुर में हाल ही में संक्रमण के जितने मामले सामने आए थे, उनमें से 58 प्रतिशत एक्सबीबी स्वरूप के थे। लेकिन एक ओर जहां दुनिया भर में एक्सबीबी मामलों में वृद्धि देखी जा रही है तो दूसरी ओर सिंगापुर में इसके मामले कम होने लगे हैं। वैज्ञानिक उन विभिन्न क्षेत्रों पर करीब से नजर रख रहे हैं जहां ये दोनों वेरिएंट पाए जा रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि कहां इनके ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
एस जयशंकर ने कंबोडिया में अमेरिकी विदेश मंत्री से की मुलाकात, ट्वीट कर कहा- अच्छी बैठक हुई
बीक्यू.1 और एक्सबीबी के बीच क्या अंतर है?
स्पाइक प्रोटीन (वायरस की सतह पर एक प्रोटीन, जो इसे हमारी कोशिकाओं में जाने देता है) के ‘रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन’ में कई साझा उत्परिवर्तन होने के कारण ओमीक्रोन स्वरूप सफल होते हैं। रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) वायरस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो स्पाइक प्रोटीन पर स्थिति होता है। स्पाइक प्रोटीन आरबीडी को शरीर के रिसेप्टर में जाने देता है, जिसके बाद यह कोशिकाओं में जाकर संक्रमण फैलाता है।

बीक्यू.1 और एक्सीबी के बीच इनके रूप बदलने और अलग-अलग जगहों में फैलने लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर है। स्पाइक प्रोटीन के जरिए वायरस हमारी कोशिकाओं को संक्रमित करता है और बीमारियों से रक्षा करने वाली हमारी एंटीबॉडी को निशाना बनाता है। एक हालिया अध्ययन से पता चलता है कि रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन के भीतर उत्परिवर्तन एक्सबीबी को, कोविड टीकों द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडी को बेअसर करने मदद कर सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि हमने कोरोना वायरस के जितने स्वरूप देखे हैं उनमें एक्सबीबी एंटीबॉडी को चकमा देने के मामले में सबसे आगे है।

क्या हमें एक्सबीबी से चिंतित होना चाहिए?
बीक्यू.1 और इसके मूल स्वरूप बीए.5 की तुलना में एक्सबीबी के प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने की अधिक आशंका रहती है, जिसके चलते यह काफी अंदर तक फैल सकता है, जिससे वायरस का प्रकोप बढ़ सकता है। अच्छी खबर यह है कि सिंगापुर के आंकड़ों के आधार पर, एक्सबीबी में बीए.5 की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 30 प्रतिशत कम होने का अनुमान लगाया गया है। लेकिन हमारे पास अभी अन्य देशों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है इसलिए ऐसा हो सकता है कि एक्सबीबी और व्यापक रूप धारण कर ले। इस बात की भी आशंका है ब्रिटेन आने वाले समय में कोरोना वायरस की दोहरी लहर का सामना करे। इनमें से एक लहर यूरोप और अमेरिका में फैले बीक्यू.1 से जबकि दूसरी लहर एशिया में फैले एक्सबीबी से उठ सकती है। ऐसे में वक्त ही हमें बता सकता है कि एक्सबीबी बीए.5 या बीक्यू.1 की जगह लेगा, या फिर कोई अन्य स्वरूप अपने पांव पसारने के इंतजार में है।

(विक्टोरिया ईस्टन, वायरोलॉजी रिसर्च एंड टीचिंग फेलो, स्कूल ऑफ मॉलीक्यूलर एंड सेलुलर बायोलॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स)

मुंबई जीनोम अनुक्रमण: एक्सबीबी सबवेरिएंट के साथ 234 नमूनों में से 36 का पता चला, 33 में XBB

मुंबई: मुंबई में 16वीं जीनोम अनुक्रमण श्रृंखला में परीक्षण किए गए सभी 234 स्वैब नमूनों में कोरोनवायरस के ओमिक्रॉन संस्करण का पता चला है, जिसमें 36, या 15 प्रतिशत, एक्सबीबी सबवेरिएंट के साथ, एक नागरिक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा।

बृहन्मुंबई नगर निगम की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 234 नमूनों में से 14 प्रतिशत या 33 नमूने XBB.1 सबवेरिएंट से संक्रमित पाए गए हैं।

"234 रोगियों में से, 24 (10 प्रतिशत) 20 वर्ष से कम आयु के थे, 94 (40 प्रतिशत) 21-40 आयु वर्ग में, 69 (29 प्रतिशत) 41-60 आयु वर्ग में, 36 (15) प्रतिशत) 61 और 80 वर्ष की आयु के बीच, और 11 (5 प्रतिशत) 81 वर्ष से ऊपर हैं," नागरिक विज्ञप्ति ने बताया।

जिन रोगियों के नमूनों को जीनोम अनुक्रमित किया गया था, उनकी आयु का और अधिक विवरण देते हुए, विज्ञप्ति में कहा गया है कि 16 की आयु 18 वर्ष से कम थी, तीन पांच वर्ष से कम उम्र के थे, छह 6-12 आयु वर्ग के थे और छह 14- में थे। 18 आयु खंड।

इसने कहा कि 234 में से 87 रोगियों ने COVID-19 वैक्सीन नहीं लिया था, और उनमें से 15 को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, हालांकि उनमें से किसी को भी आईसीयू में प्रवेश की आवश्यकता नहीं थी।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन 147 मरीजों को टीका लगाया गया था, उनमें से सात को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि दो मरीजों की मौत कॉमरेडिडिटी के कारण निजी अस्पतालों में हुई, जिनमें से एक की उम्र 88 साल थी।

बीएमसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि इन सबवेरिएंट से घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन लोगों से कहा कि वे सीओवीआईडी ​​​​उपयुक्त व्यवहार का सख्ती से पालन करें और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों का पालन करें।

ओमीक्रोन एक्सबीबी से संक्रमित भारतीय रोगियों में हल्के लक्षण: इन्साकॉग

नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ (इन्साकॉग) ने कहा है कि कोविड-19 के ओमीक्रोन उप-स्वरूप एक्सबीबी से संक्रमित भारतीय रोगियों में हल्के लक्षण हैं और उनमें गंभीर समस्या नहीं देखी गयी है। विशेषज्ञों के समूह इन्साकॉग ने कहा कि देश में अनेक राज्यों में रोगियों में एक्सबीबी स्वरूप के संक्रमण का पता चला है। उसने एक बयान में कहा कि वह एक्सबीबी और एक्सबीबी.1 की उत्पत्ति और विकास पर तथा अन्य किसी नये उप-स्वरूप पर करीबी नजर रख रहा है। उसने कहा, ‘‘समुदाय को घबराने की जरूरत नहीं है और त्योहारों का मौसम होने के कारण कोरोना वायरस

विशेषज्ञों के समूह इन्साकॉग ने कहा कि देश में अनेक राज्यों एक्सटीबी में रोगियों में एक्सबीबी स्वरूप के संक्रमण का पता चला है। उसने एक बयान में कहा कि वह एक्सबीबी और एक्सबीबी.1 की उत्पत्ति और विकास पर तथा अन्य किसी नये उप-स्वरूप पर करीबी नजर रख रहा है।

उसने कहा, ‘‘समुदाय को घबराने की जरूरत नहीं है और त्योहारों का मौसम होने के कारण कोरोना वायरस संबंधी उचित व्यवहार अपनाने की सिफारिश की जाती है।’’

इन्साकॉग ने कहा कि इससे संक्रमित भारतीय रोगियों में हल्के लक्षण देखे गये हैं और गंभीर समस्या नहीं देखी गयी है।

उसने कहा कि महामारी के मौजूदा चरण में सार्स-सीओवी-2 वायरस लगातार अन्य स्वरूपों में उत्परिवर्तित हो रहा है, जिनमें से कुछ अधिक संक्रमण क्षमता वाले हो सकते हैं और वे रोग प्रतिरोधक क्षमता से बचकर निकल सकते हैं।

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