ट्रेडिंग विचार

खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली

खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली

हैदराबाद क्षेत्र के अंतर्गत शाखाओं के लिए किराए के आधार पर आवश्यक भूतल परिसर

बैंक खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली ऑफ महाराष्‍ट्र कभी भी फोन कॉल/ई-मेल/एसएमएस के माध्‍यम से किसी भी उद्देश्‍य हेतु बैंक खाते के ब्‍यौरे नहीं मांगता।
बैंक सभी ग्राहकों से अपील करता है कि ऐसे किसी भी फोन कॉल/ई-मेल/एसएमएस का उत्‍तर न दें, और किसी से भी, किसी भी उद्देश्‍य हेतु अपने बैंक खाते के ब्‍यौरे साझा न करें। किसी से भी अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड का सीवीवी/पिन साझा न करें।

मोदी सरकार को बड़ा झटका, पांच फीसदी बढ़ी खुदरा महंगार्इ

infilation rate

नई दिल्ली। चुनावी साल में मोदी सरकार को एक के बाद एक झटका लग रहा है। पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतें, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, रुपए की गिरती कीमत के बाद अब महंगाई के मोर्चे पर मोदी सरकार को करारा झटका लगा है। ईंधन तथा आवास महंगे होने से जून में उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर यानी खुदरा महंगाई बढ़कर पांच फीसदी पर पहुंच गई है। खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने बढ़ी है और यह इसका इस साल जनवरी (5.07 फीसदी) के बाद का उच्चतम स्तर है। खास बात यह है कि खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में कमी के बावजूद जून में इसका ग्राफ ऊपर गया है जो सरकार के लिए चिंता की बात हो सकती है। खाद्य खुदरा महंगाई दर 2.91 फीसदी दर्ज की गई है जो मई में 3.10 फीसदी रही थी। पिछले साल जून में सामान्य खुदरा महंगाई दर 1.46 फीसदी और इस साल मई में खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली 4.87 फीसदी रही थी।

NDTV का सबसे बड़ा शेयरधारक बनने की ओर अडानी समूह, खुली पेशकश में मिले 53 लाख शेयर

एनडीटीवी के शेयरधारकों ने शनिवार को अडाणी समूह को करीब 53 लाख शेयरों की पेशकश की. इससे समूह मीडिया कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक बन जाएगा और उसे प्रसारणकर्ता कंपनी का चेयरमैन नियुक्त करने का अधिकार मिल जाएगा.

NDTV का सबसे बड़ा शेयरधारक बनने की ओर अडानी समूह, खुली पेशकश में मिले 53 लाख शेयर

नई दिल्ली, 4 खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली दिसंबर: एनडीटीवी (NDTV) के शेयरधारकों ने शनिवार को अडानी समूह (Adani Group)को करीब 53 लाख शेयरों की पेशकश की. इससे समूह मीडिया कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक (Shareholder of NDTV) बन जाएगा और उसे प्रसारणकर्ता कंपनी का चेयरमैन नियुक्त करने का अधिकार मिल जाएगा. Ravish Kumar Resigns: अब रवीश कुमार ने NDTV से दिया इस्तीफा, अडानी के हाथ में आते ही मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव

अडाणी समूह ने एक छोटी कंपनी का अधिग्रहण खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली करके नयी दिल्ली टेलीविजन लि.(एनडीटीवी) में 29.18 प्रतिशत हिस्सदारी पर अप्रत्यक्ष अधिकार हासिल कर लिया था. इसके बाद समूह मीडिया कंपनी के निवेशकों के लिए खुली पेशकश लेकर आया.

शेयर बाजार की अधिसूचना के मुताबिक, यह खुली पेशकश पांच दिसंबर को बंद होगी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, अडाणी की खुली पेशकश के तहत एनडीटीवी के अल्पांश शेयरधारकों से 294 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 1.67 करोड़ या 26 प्रतिशत शेयरों की खरीद की पेशकश की गई है. इसमें से अडाणी समूह को अबतक 53.27 लाख शेयरों के लिए प्रस्ताव मिल चुके हैं.

कॉरपोरेट निवेशकों ने सर्वाधिक 39.34 लाख शेयरों की पेशकश की जबकि खुदरा निवेशकों ने सात लाख से अधिक शेयरों की पेशकश की. पात्र संस्थागत खरीदारों ने 6.86 लाख शेयरों की पेशकश की.

अडाणी की खुली पेशकश एनडीटीवी के शेयर के मौजूदा भाव की तुलना में काफी कम कीमत पर की गई है. खुली पेशकश के तहत शेयर का भाव 294 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि शुक्रवार को शेयर बाजारों में एनडीटीवी का शेयर 414.40 रुपये पर बंद हुआ था. अबतक जितने शेयरों की पेशकश की गई है वह एनडीटीवी के शेयरों का 8.26 प्रतिशत है. इसके अलावा अडाणी समूह 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी पहले ही हासिल कर चुका है. अब इन्हें मिलाकर मीडिया कंपनी में समूह की हिस्सेदारी 37.44 प्रतिशत होगी जो इसके संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय की 32.26 प्रतिशत हिस्सेदारी से अधिक है.

इससे पहले एनडीटीवी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 61.45 प्रतिशत थी. इसमें 1.88 करोड़ शेयर या 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की थी जिसका गौतम अडाणी की अगुवाई वाले अडाणी समूह ने गत अगस्त में अप्रत्यक्ष तरीके से अधिग्रहण कर लिया था. अब एनडीटीवी का सबसे बड़ा शेयरधारक बनने के बाद अडाणी समूह को कंपनी के निदेशक मंडल के चेयरपर्सन समेत कम से कम दो खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली निदेशक नियुक्त करने का अधिकार मिल जाएगा.

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Cooking oil price today, 03 Dec 2022: इंपोर्टेड तेल के दाम टूटने से तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट, जानिए ताजा भाव

Cooking oil rate today, 03 दिसंबर 2022 : सस्ते आयातित तेलों की वजह से सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, पाम और पामोलीन तेल कीमतों प्रभावित हुई हैं। विदेशी तेलों में आई गिरावट हमारे देशी तेल तिलहनों पर कड़ा प्रहार हो रहा है। जानिए आज का ताजा भाव।

Updated Dec 3, 2022 | 10:57 PM IST

Cooking oil price today, 03 Dec 2022: इंपोर्टेड तेल के दाम टूटने से तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट, जानिए ताजा भाव

Cooking oil price today

खाने वाले तेल के भाव में गिरावट

नई दिल्ली : विदेशी बाजारों में तेल-तिलहनों के दाम टूटना जारी रहने के कारण में देशी तेल तिलहनों के भाव प्रभावित हुए, जिससे दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ), बिनौला और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली। देशी तेल तिलहनों की पेराई महंगा बैठने और सस्ते आयातित तेलों के मुकाबले इन तेलों के भाव बेपड़ता होने के बीच सरसों और खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली मूंगफली तेल-तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशी तेलों में आई गिरावट हमारे देशी तेल तिलहनों पर कड़ा प्रहार कर रहा है जिससे समय रहते नहीं निपटा गया तो स्थिति संकटपूर्ण होने की संभावना है। विदेशी तेलों के दाम धराशायी हो गये हैं और हमारे देशी तेलों के उत्पादन की लागत अधिक बैठती है। अगर स्थिति को संभाला नहीं गया तो देश में तेल तिलहन उद्योग और इसकी खेती गंभीर रूप से प्रभावित होगी। सस्ते आयातित तेलों पर आयात कर अधिकतम करते हुए स्थिति को संभाला नहीं गया तो किसान तिलहन उत्पादन बढ़ाने के बजाय तिलहन खेती से विमुख हो सकते हैं क्योंकि देशी तेलों के उत्पादन की लागत अधिक होगी। देश के आयात पर पूर्ण निर्भरता होने के कारण भारी मात्रा में विदेशीमुद्रा का अपव्यय बढ़ सकता खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली है।

सूत्रों ने कहा कि सरसों, मूंगफली, सोयाबीन और बिनौला जैसे देशी तेल तिलहन की हमें बिजाई हर साल करनी होती है। इसके अलावा खाद, पानी, बिजली, डीजल, मजदूरी जैसी लागत हर साल वहन करना होता है लेकिन पाम और पामोलीन के मामले में यह स्थिति भिन्न है क्योंकि एक बार इनके पेड़ लगाने के बाद मामूली देखरेख खर्च के साथ बगैर बड़ी लागत के अगले लगभग कई सालों तक ऊपज प्राप्त होती रहती है।

सूत्रों ने कहा कि कई तेल तिलहन विशेषज्ञ, पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के कुछ अन्य भागों में पाम की खेती बढ़ाने की सलाह देते हैं और इस दिशा में सरकार ने प्रयास भी किये हैं। ऐसा करना एक हद तक सही है लेकिन यदि हमें पशुचारे, डीआयल्ड केक (डीओसी) और मुर्गीदाने की पर्याप्त उपलब्धता और आत्मनिर्भरता चाहिये तो वह सरसों, मूंगफली, सोयाबीन और बिनौला जैसे देशी फसलों से ही प्राप्त हो सकता है। निजी उपयोग के अलावा इसका निर्यात कर देश के लिए विदेशीमुद्रा भी अर्जित किया जा सकता है। तेल तिलहन के खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली संदर्भ में इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लिया जाना चाहिये।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:-

  • सरसों तिलहन - 7,100-7,150 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
  • मूंगफली - 6,360-6,420 रुपये प्रति क्विंटल।
  • मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,800 रुपये प्रति क्विंटल।
  • मूंगफली रिफाइंड तेल 2,390-2,655 रुपये प्रति टिन।
  • सरसों तेल दादरी- 14,000 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सरसों पक्की घानी- 2,120-2,250 रुपये प्रति टिन।
  • सरसों कच्ची घानी- 2,180-2,305 रुपये प्रति टिन।
  • तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,500 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सीपीओ एक्स-कांडला- 8,450 रुपये प्रति क्विंटल।
  • बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,450 रुपये प्रति क्विंटल।
  • पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,950 रुपये प्रति क्विंटल।
  • पामोलिन एक्स- कांडला- 9,000 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
  • सोयाबीन दाना - 5,450-5,550 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सोयाबीन लूज 5,260-5,310 रुपये प्रति क्विंटल।
  • मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

सूत्रों ने कहा कि देश के प्रमुख तेल संगठनों को सरकार को जमीनी हकीकत भी बताना चाहिये कि सस्ते खाद्यतेलों के आयात से देश के तेल तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य गंभीर रूप से प्रभावित होगा खुदरा विदेशी मुद्रा बाजार में बोली और इस स्थिति को बदलने के लिए इन सस्ते आयातित तेलों पर पहले की तरह और हो सके तो अधिकतम सीमा तक आयात शुल्क लगा दिया जाना चाहिये। अगर खाद्य तेलों के दाम कम रहे तो खल की भी उपलब्धता कम हो जायेगी। सस्ते आयात के मद्देनजर सीपीओ, पामतेल, बिनौला और सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट आई। जबकि शादी विवाह के मौसम की मांग के बीच देशी तेलों का भाव बेपड़ता बैठने के कारण सरसों और मूंगफली तेल तिलहन और सोयाबीन दाना एवं सोयाबीन लूज (तिलहन) के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

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