ट्रेडिंग विचार

क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है

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हालांकि भालू 1.1645 की रक्षा करने में विफल रहे, उन्होंने 1.1645 पर अच्छा प्रदर्शन किया। जब तक कीमत इस स्तर से नीचे नहीं हो जाती, तब तक युग्म के पास गिरावट का पूरा मौका होगा। इस स्तर के झूठे ब्रेकआउट के बाद कम जाना बेहतर होगा। इस स्थिति में, युग्म 1.1656 के निकटतम समर्थन स्तर तक खिसक सकता है। 1.1656 का ब्रेकआउट और ऊपर की ओर परीक्षण 1.1619 पर लक्ष्य के साथ एक सही बिक्री संकेत देगा, जहां इसे मुनाफे में लॉक करने की क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है सिफारिश की जाती है। अगला लक्ष्य 1.1581 पर है, जहां खरीदारों की चलती औसत है। यदि पाउंड/डॉलर की जोड़ी बढ़ती है और भालू 1.1694 की रक्षा करने में विफल रहते हैं, तो बैलों के पास कीमत को अधिक बढ़ाने का मौका होगा। इन शर्तों के तहत, 1.1724 के नए उच्च का केवल एक झूठा ब्रेकआउट एक बिक्री संकेत देगा। 1.1757 या उससे भी अधिक के रिबाउंड के बाद – 1.1793 से, दिन के भीतर 30-35 पिप्स की गिरावट की उम्मीद करते हुए बेचना भी संभव है।

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What is Technical Analysis in Stock Market? in Hindi

तकनीकी विश्लेषण क्या होता है? What Is Technical Analysis?

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) एक उपकरण, या विधि है, जिसका उपयोग किसी सुरक्षा के संभावित भविष्य के मूल्य आंदोलन की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) की वैधता के पीछे यह धारणा है कि बाजार में सभी प्रतिभागियों की सामूहिक क्रियाएं – खरीदना और बेचना – एक व्यापारिक सुरक्षा से संबंधित सभी प्रासंगिक जानकारी को सटीक रूप से दर्शाती हैं, और इसलिए, लगातार सुरक्षा के लिए उचित बाजार मूल्य प्रदान करती हैं। .

तकनीकी व्यापारियों का मानना है कि बाजार में वर्तमान या पिछले मूल्य की गति, भविष्य की कीमत की गति का सबसे विश्वसनीय संकेतक है।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का उपयोग न केवल तकनीकी व्यापारियों द्वारा किया जाता है। कई मौलिक व्यापारी मौलिक विश्लेषण क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए करते हैं कि बाजार में खरीदना है या नहीं, लेकिन यह निर्णय लेने के बाद वो तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करके अच्छे, कम जोखिम वाले खरीद प्रवेश मूल्य स्तरों को इंगित करते है ।

तकनीकी विश्लेषण को कैसे समझे ? ( How to u nderstanding Technical Analysis)

मौलिक विश्लेषण के विपरीत, जो बिक्री और कमाई जैसे व्यावसायिक परिणामों के आधार पर सुरक्षा के मूल्य का मूल्यांकन करने का प्रयास करता है, तकनीकी विश्लेषण कीमत और मात्रा के अध्ययन पर केंद्रित है। तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) उपकरण का उपयोग सुरक्षा के लिए आपूर्ति और मांग के तरीकों की जांच करने के लिए किया जाता है, जो कीमत, मात्रा और निहित अस्थिरता में परिवर्तन को प्रभावित करेगा।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का उपयोग अक्सर विभिन्न चार्टिंग टूल से अल्पकालिक व्यापारिक संकेतों को उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह व्यापक बाजार या इसके किसी एक क्षेत्र के सापेक्ष सुरक्षा की ताकत या कमजोरी के मूल्यांकन में सुधार करने में भी मदद कर सकता है। यह जानकारी विश्लेषकों को अपने समग्र मूल्यांकन अनुमान को बेहतर बनाने में मदद करती है।

ऐतिहासिक ट्रेडिंग डेटा के साथ किसी भी सुरक्षा पर तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का उपयोग किया जा सकता है। इसमें स्टॉक, वायदा, वस्तुएं, निश्चित आय, मुद्राएं और अन्य प्रतिभूतियां शामिल हैं। इस ट्यूटोरियल में, हम आमतौर पर अपने उदाहरणों में स्टॉक का विश्लेषण करेंगे, लेकिन ध्यान रखें कि इन अवधारणाओं को किसी भी प्रकार की सुरक्षा पर लागू किया जा सकता है। वास्तव में, वस्तुओं और विदेशी मुद्रा बाजारों में तकनीकी विश्लेषण कहीं अधिक प्रचलित है जहां व्यापारी अल्पकालिक मूल्य आंदोलनों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) इस धारणा से संचालित होता है कि पिछली व्यापारिक गतिविधि और सुरक्षा के मूल्य परिवर्तन सुरक्षा के भविष्य के मूल्य आंदोलनों के मूल्यवान संकेतक हो सकते हैं जब उचित निवेश या व्यापारिक नियमों के साथ जोड़ा जाता है। पेशेवर विश्लेषक अक्सर अनुसंधान के अन्य रूपों के संयोजन के साथ तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करते हैं। रिटेल व्यापारी पूरी तरह से एक सुरक्षा और इसी तरह के आंकड़ों के मूल्य चार्ट के आधार पर निर्णय ले सकते हैं, लेकिन इक्विटी विश्लेषकों का अभ्यास शायद ही कभी मौलिक या तकनीकी विश्लेषण के लिए अपने शोध को सीमित करता है।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) वस्तुतः किसी भी व्यापार योग्य उपकरण के मूल्य आंदोलन की भविष्यवाणी करने का प्रयास करता है जो आम तौर पर स्टॉक, बॉन्ड, वायदा और मुद्रा जोड़े सहित आपूर्ति और मांग की ताकतों के अधीन होता है। वास्तव में, कुछ तकनीकी विश्लेषण को केवल आपूर्ति और मांग बलों के अध्ययन के रूप में देखते हैं जैसा कि एक सुरक्षा के बाजार मूल्य आंदोलनों में परिलक्षित होता है। तकनीकी विश्लेषण आमतौर पर मूल्य परिवर्तनों पर लागू होता है, लेकिन कुछ विश्लेषक केवल कीमत के अलावा अन्य नंबरों को ट्रैक करते हैं, जैसे कि ट्रेडिंग वॉल्यूम या ओपन इंटरेस्ट के आंकड़े।

पूरे उद्योग में, सैकड़ों पैटर्न और संकेत हैं जो शोधकर्ताओं द्वारा तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) व्यापार का समर्थन करने के लिए विकसित किए गए हैं। तकनीकी विश्लेषकों ने मूल्य आंदोलनों पर पूर्वानुमान और व्यापार करने में मदद करने के लिए कई प्रकार की व्यापारिक प्रणालियां भी विकसित की हैं। कुछ संकेतक मुख्य रूप से समर्थन और प्रतिरोध क्षेत्रों सहित मौजूदा बाजार प्रवृत्ति की पहचान करने पर केंद्रित होते हैं, जबकि अन्य एक प्रवृत्ति की ताकत क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है और इसके जारी रहने की संभावना को निर्धारित करने पर केंद्रित होते हैं। आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी संकेतक और चार्टिंग पैटर्न में ट्रेंडलाइन, चैनल, मूविंग एवरेज और मोमेंटम इंडिकेटर्स शामिल हैं।

सामान्य तौर पर, तकनीकी विश्लेषक निम्नलिखित व्यापक प्रकार के संकेतकों को देखते हैं:

  • मूल्य रुझान (Price trends)
  • चार्ट पैटर्न (Chart Pattern)
  • मात्रा और गति संकेतक ( Volume and momentum indicators)
  • दोलक (Oscillataors)
  • मूविंग एवरेज (Moving Avarage)
  • समर्थन और प्रतिरोध स्तर ( Support & Ressistance )

तकनीकी विश्लेषण का उपयोग कैसे किया जाता है? (How Is Technical Analysis Used?)

तकनीकी विश्लेषण वस्तुतः किसी भी व्यापार योग्य उपकरण के मूल्य आंदोलन की भविष्यवाणी करने का प्रयास करता है जो आम तौर पर स्टॉक, बॉन्ड, वायदा और मुद्रा जोड़े सहित आपूर्ति और मांग की ताकतों के अधीन होता है। पूरे उद्योग में, सैकड़ों पैटर्न और संकेत हैं जो शोधकर्ताओं द्वारा तकनीकी विश्लेषण व्यापार का समर्थन करने के लिए विकसित किए गए हैं। तकनीकी विश्लेषकों ने मूल्य आंदोलनों पर पूर्वानुमान और व्यापार करने में मदद करने के लिए कई प्रकार की व्यापारिक प्रणालियां भी विकसित की हैं।

इस साल अल नीनो के 70% चांस, जानें क्या है अल नीनो ?

मौसम की जानकारी देने वाली ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी ने यह चेतावनी दी है

el nino

हाइलाइट्स

  • आस्ट्रेलियाई एजेंसी का यह अनुमान भारत के लिए शुभ संकेत नहीं हैं क्योंकि 1 जून के आसपास देश में मानसूनी सीजन का आगाज होता है
  • भारत में मानसून सीजन जून से लेकर सितंबर तक चलता है यानी अगर मौसम सामान्य रहता है तो 4 महीने जमकर बारिश होती है
  • देश में आमतौर पर अगस्त से लेकर सितंबर तक सबसे ज्यादा (करीब 70 फीसदी) बारिश होती है.

भारत में मानसून सीजन जून से लेकर सितंबर तक चलता है यानी अगर मौसम सामान्य रहता है तो 4 महीने जमकर बारिश होती है. देश में आमतौर पर अगस्त से लेकर सितंबर तक सबसे ज्यादा (करीब 70 फीसदी) बारिश होती है.

ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने कहा है कि 2019 में अल नीनो की संभावना करीब 70 फीसदी तक है. जो सामान्य से करीब तीन गुना अधिक है. इससे साथ ही एजेंसी ने अल नीनो को 'वॉच' मोड से 'अलर्ट' मोड में अपग्रेड किया है. एजेंसी ने कहा है कि सर्वे में शामिल किए गए आठ क्लाइमेट मॉडल में से सात ने अप्रैल से जून के दौरान समुद्र की सतह का तापमान अल नीनो की सीमा से अधिक रहने का पूर्वानुमान दिया है.

ब्यूरो ने अपने पिछले पूर्वानुमान में अल नीनो की 50 फीसदी संभावना जताई थी. हालांकि, मौसम की भविष्यवाणी करने वाली भारत की एजेंसियों का कहना है कि मानसून की बारिश पर अल नीनो का असर पड़ने की आशंका नहीं है. देश के मौसम विभाग (IMD) ने इस महीने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि मई आते-आते क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है अल नीनो की स्थितियां कमजोर पड़ सकती हैं. इसके बाद अल नीनो और कमजोर होने का अनुमान है.

मौसम की भविष्यवाणी करने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट ने फरवरी में मॉनसून पर अपने शुरुआती अनुमान में कहा था कि देश में इस वर्ष सामान्य बारिश हो सकती है और अल नीनो की आशंका मॉनसून के बढ़ने के साथ कम हो सकती है.

क्या है अल नीनो ?

अल-नीनो के प्रभाव से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म हो जाती है, इससे हवाओं का रास्ते और रफ्तार में परिवर्तन आ जाता है जिसके चलते मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है. मौसम में बदलाव के कारण कई स्थानों पर सूखा पड़ता है तो कई जगहों पर बाढ़ आती है. इसका असर दुनिया भर में दिखाई देता है.

जिस वर्ष अल-नीनो की सक्रियता बढ़ती है, उस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून पर उसका असर निश्चित रूप से पड़ता है. भारत में दक्षिण पश्चिमी मानसून को ही मॉनसून सीजन कहा जाता है क्योंकि जून से सितंबर तक 70 फीसदी बारिश इन्हीं चार महीनों के दौरान होती है. भारत में अल नीनो के कारण सूखे का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.

कितनी विश्वसनीय होती है ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी की रिपोर्ट ?
मौसम की जानकारी देने वाली ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी पिछले करीब 110 साल से मौसम की भविष्यवाणी दे रही है. इसके हेड ऑफिस में लगा Cray XC 40 सुपरकंप्यूटर जिसे "ऑस्ट्रेलिस" कहा जाता है. यह सुपर कंप्यूटर मौसम, जलवायु, समुद्री हलचलों की सटीक भविष्यवाणी करता है. ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी की रिपोर्ट दुनियाभर के मौसम एवं कृषि वैज्ञानिकों के बीच काफी विश्वसनीय मानी जाती है.

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भास्कर ओरिजिनल: 2015 में 26 हजार में मिलता था 10 ग्राम सोना, 2020 में 56 हजार पार हुआ; जानें अगले 3 साल में कहां पहुंचेगा?

भारत में सोने की खानें न के बराबर हैं। 2019 में 96% सोना विदेशों से खरीदा गया। इसके आयात पर सरकार को 12.5% इंपोर्ट ड्यूटी भी चुकानी होती है। फिर भी पिछले साल 2,295 अरब का सोना विदेशों से खरीदा गया था। हमारे यहां सोना खरीदना रईसी की निशानी है। इसके बावजूद 2020 में इसकी मांग में 300 अरब रुपए की गिरावट आई और सिर्फ 1,992 अरब रुपए का ही सोना आयात हुआ।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वेलरी की खरीदारी में 2020 की पहली तिमाही में 41%, दूसरी क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है में 48% और तीसरी में 48% की गिरावट आई। 2009 के बाद 10 सालों में ऐसा पहली बार हआ, जब इतना कम सोना खरीदा गया। फिर भी अगस्त 2020 में 1 तोला यानी 10 ग्राम सोने का भाव पहली बार 56 हजार के पार चला गया। जब मांग घट रही थी, लोग सोना खरीद नहीं रहे थे, तो रेट में बढ़ोतरी क्यों?

चौथी तिमाही की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद धनतेरस और दिवाली पर करीब 30 टन सोना बिका था, जो 2019 के 40 टन से 25% ही कम है। यानी सोने की खरीदारी में फिर से तेजी आ रही है। इधर सोना 56 हजार से कम होकर 50 हजार के आसपास आ गया है।

जब-जब दुनिया में संकट आएगा, लोग सोना खरीदेंगे
भोपाल के सर्राफा एसोसिएशन के सचिव नवनीत अग्रवाल कहते हैं, 'अब सोना भी सट्टेबाजी जैसा मार्केट बनता जा रहा है। वायदा बाजार यानी MCX ने बड़े-बड़े पूंजीपतियों के लिए सोने में निवेश के लिए रास्ते खोल दिए हैं। वे सोना अपने पास रखने के लिए नहीं खरीदते। सोने में पैसा लगाते हैं, भाव बढ़ने पर बेच कर रिटर्न कमाते हैं। एकदम शेयर बाजार की तरह।'

सोना चार तरह से बिकता है.

  1. ज्वेलरी
  2. गोल्ड बार यानी सिक्के, बिस्किट, छड़
  3. गोल्ड बॉन्ड
  4. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX

आम दिनों में ज्वेलरी अधिक खरीदी जाती है। लेकिन 2020 में MCX और गोल्ड बार में 50% से ज्‍यादा उछाल दर्ज की गई। लोगों ने सोने के सिक्के, बिस्किट और छड़ में या फिर MCX में पैसे निवेश किए। MCX से खरीदा गया इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज सोना, शेयर मार्केट की तरह बैंक खाते में दिखता है। इसे होम डिलिवरी भी कराई जा सकती है, पर आमतौर लोग ऐसा नहीं करते क्योंकि वे जल्दी-जल्दी खरीदते और बेचते हैं। गोल्ड बॉन्ड लेने पर सरकार एक साल में 2% रिटर्न की गारंटी देती है।

नवनीत अग्रवाल कहते हैं कि लोगों ने सोना पैसा बनाने के लिए खरीदा। दुनिया में जब कभी कोई बड़ा संकट आता है। दो देशों में तकरार होती है, किसी भी कारण से अर्थव्‍यवस्‍थाएं चरमराती हैं, तो लोग पैसे शेयर बाजार, रियल स्टेट और दूसरी इंडस्ट्री से निकाल कर सोने में लगा देते हैं। क्योंकि सोना कभी घाटे का सौदा नहीं है।

साल क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है 2000 में एक तोला सोना 4,400 रुपए में था, 2010 में 18,500 और 2020 में 50,000 पार हो गया। कोरोना काल में जब दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍थाएं बंद थीं, तब लोग अपने पैसे को सुरक्षित करने के लिए सोना खरीदना चाहते थे। भोपाल के डीबी मॉल स्थित आनंद ज्वेल्स के मैनेजर अभिषेक पोरवाल कहते हैं, 'लॉकडाउन में लगातार फोन आते रहे, लोग किसी तरह से सोना खरीदना चाहते थे।'

ट्रंप और बाइडेन भी जिम्मेदार
दुनिया में सबसे ज्यादा सोना अमेरिका के पास है। दूसरा सबसे अधिक सोना रखने वाले देश जर्मनी के पास अमेरिका के सोना भंडार का आधा भी नहीं है।

दुनिया का सबसे बड़ा सोना बाजार शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज यानी COMEX भी अमेरिका में है। इसलिए अमेरिका दुनियाभर के सोने के भाव प्रभावित करता है। जब अमेरिकी राजनीति या अर्थव्‍यवस्‍था में उथल-पुथल मचती है, तो पूरी दुनिया में सोने की कीमत बढ़नी शुरू हो जाती है। 2020 में अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन के बीच कड़ी टक्कर में बाजार अस्थिर होता चला गया। तब सोने के भाव बढ़ते चले गए।

वैक्सीन का ऐलान होते गिरा सोना
कोरोना संकट भले ही अभी न टला हो, पर वैक्सीन की खबरें उफान पर हैं। अगस्त 2020 तक सोने का भाव बढ़ता जा रहा था। लेकिन अगस्त में ही रूस ने पहली कोरोना वैक्सीन का ऐलान किया। सितंबर से सोना टूटने लगा। अब वर्ल्ड बैंक की भविष्यवाणी मानें, तो 2030 तक सोने के भाव में 10% से 20% तक की गिरावट आएगी।

स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 5 साल में दुनियाभर में सोने के भाव में करीब 10% की गिरावट आएगी।

अमेरिका के चुनाव नतीजे भी अब साफ हैं। जो बाइडेन का सत्ता में आना तय है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी अगले कुछ सालों में किसी बड़े संघर्ष के आसार नहीं हैं। रिच डैड पूअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी कहते हैं कि अगले 5 सालों तक सोने में निवेश करना कोई समझदारी भरा कदम नहीं होगा।

अगले 2 सालों में भारत में 68 हजार रुपये तक जा सकता है सोना
ग्लोबल मार्केट से एकदम उलट भारत के ट्रेड एनालिस्ट और सोना कारोबारियों को भरोसा है कि अगले दो सालों में एक तोला सोना 68 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। भोपाल के आनंद ज्वेल्स के मैनेजर अभिषेक पोरवाल कहते हैं, 'सोने के खरीदारों का माइंडसेट बदल गया है। शौकिया खरीदार गायब हो गए हैं। जिनके पास निवेश के लिए पैसा है, वो प्रॉपर्टी, शेयर मार्केट छोड़ सोने के सिक्के, बिस्किट और छड़ खरीद रहे हैं। इस साल दाम 60 हजार पार हो सकते हैं।'

नवनीत अग्रवाल कहते हैं, 'भारत में तीन तरह के सोना खरीदार हैं। पहले मिडिल क्लास वाले, ये सोना खरीदकर घर ले जाते हैं। दूसरे अपर क्लास वाले, ये कुछ घर ले आते हैं, तो कुछ इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज में पैसे डालते हैं। लेकिन फिलहाल तीसरे तरह के खरीदारों का मार्केट पर दबदबा है। ये हैं कार्पोरेट हाउस, ये आने वाले दिनों में और पैसा डालेंगे। कोरोना का दूसरा स्ट्रेन आ गया है। मार्केट और चढ़ेगा।'

हाउस ऑफ रांका ज्वेलर्स के वस्तुपाल रांका के मुताबिक, 2021 में सोने के भाव चढ़े रहेंगे। 10 ग्राम सोना 63 हजार के पार जा सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस के उपाध्यक्ष नवनीत धमनी का मनाना है कि सरकार का फिजिकल डेफिसिट बढ़ा है। अर्थव्‍यवस्‍था को सुधरने में अभी वक्त लगेगा। जब तक अर्थव्‍यवस्‍था नहीं सुधरती, सोना सबसे ज्यादा रिटर्न देता रहेगा। आने वाले दो सालों में एक तोला सोना 68 हजार पार कर सकता है।

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन एक अंग्रेजी पोर्टल से कहते हैं, 'पिछले तीन महीनों सोने की खरीदारी बढ़ी है। अभी यह रुकने वाली नहीं।' दिल्ली के धन्वी डायमंड के मालिक कहते हैं कि 2-3 हजार रुपए सोना घटा जरूर है, लेकिन दोबारा तेजी आ रही है। इस बार पहले से ज्यादा भाव चढ़ने वाले हैं। टॉप 10 स्टॉक ब्रोकर ने भी 2023 तक भारत में 55,क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है 000 रुपए तक सोने के भाव रहने की उम्मीद जताई है।

क्रिप्टोक्यूरेंसी एक्सचेंज टर्नकी

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क्रिप्टोक्यूरेंसी एक्सचेंज क्या है?

एक क्रिप्टोक्यूरेंसी एक्सचेंज या एक डिजिटल मुद्रा विनिमय (डीसीई) एक ऐसा व्यवसाय है जो ग्राहकों को अन्य परिसंपत्तियों जैसे कि पारंपरिक फिएट मनी या अन्य डिजिटल मुद्राओं के लिए क्रिप्टोकरेंसी या डिजिटल मुद्राओं का व्यापार करने की अनुमति देता है।

यह एक परिष्कृत क्रिप्टोक्यूरेंसी एक्सचेंज समाधान है जो सुपर-फास्ट और स्थिर मिलान इंजन प्रदर्शन और विश्वसनीय क्रिप्टो सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है। यह व्यापारियों और दलालों के लिए एक परिष्कृत उपयोगकर्ता अनुभव प्रदान करता है, क्रिप्टो ट्रेडिंग और सभी आवश्यक क्रिप्टो गतिविधियों के लिए तकनीकी बढ़त प्रदान करता है।

कोई मिलान शुल्क नहीं। कोई छिपी हुई फीस नहीं।

आप केवल तकनीकी सहायता और होस्टिंग के लिए भुगतान करते हैं। ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिए कोई छिपा हुआ भुगतान या शुल्क नहीं।

अनुकूलन योग्य यूजर इंटरफेस

संपूर्ण उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस विजेट से बनाया गया है। एक व्यवस्थापक क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है विजेट के किसी भी संयोजन को चुनने में सक्षम है जो ग्राहकों को उपलब्ध कराया जा सकता है और उनके लिए एक अद्वितीय डिफ़ॉल्ट कार्यक्षेत्र बना सकता है। रंग योजनाएं और UI के अंदर सभी शब्द भी पूरी तरह से हैं अनुकूलन योग्य। UI दिन/रात मोड उपलब्ध हैं।

ट्रेडिंग व्यू चार्ट व्यापारियों को विस्तृत तकनीकी विश्लेषण करने की अनुमति देते हैं। उन्नत उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस सबसे परिष्कृत रणनीतियों वाले व्यापारियों को भी संतुष्ट करेगा।

कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ बैकऑफ़िस

हमने मिलान करने वाले इंजन की उन्नत कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए एक बैकऑफ़िस इंटरफ़ेस बनाया है, मुद्राओं के संदर्भ में या यूएसडी समकक्ष में शेष राशि की जांच करें और उपयोगकर्ताओं और उनकी गतिविधि की सूची देखें। आप उपयोगकर्ताओं द्वारा भुगतान किए गए कमीशन की निगरानी भी कर सकते हैं, पीएनएल की गणना कर सकते हैं, क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है एक ही स्थान पर सभी ऑर्डर विवरण और भूमिकाओं की जांच कर सकते हैं, ऑनलाइन व्यापार और आर्बिट्रेज निगरानी कर सकते हैं।

B2Broker डिजिटल एसेट एक्सचेंज में विभिन्न व्यापारिक शैलियों और ग्राहकों के प्रकारों के लिए परिचित बिंदु प्रदान करते हुए प्रमुख व्यापारिक कार्यों में फैले कई, पूर्ण-विशेषताओं वाले ट्रेडिंग एपीआई की सुविधा है:

REST - सुरक्षित प्रमाणीकरण, ऑर्डर प्रविष्टि, निष्पादन रिपोर्ट, मार्केट डेटा क्वेरी के लिए समर्थन

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उच्च क्षमता मिलान इंजन

मैचिंग इंजन प्रति सेकंड 30,000 अनुरोधों को संसाधित कर सकता है। यह सप्ताहांत सहित, बिना किसी ब्रेक के क्रिप्टो बाजारों की घड़ी के आसपास बेहद छोटे रखरखाव अंतराल के साथ 24/7 काम करता है।

CoinMarketCap के साथ एकीकरण

आपको CoinMarketCap और अधिकांश अन्य लिस्टिंग वेबसाइटों पर सूचीबद्ध करने के लिए 5 आवश्यक समापन बिंदु प्रदान किए गए हैं: सारांश, व्यापार इतिहास, टिकर, संपत्ति, ऑर्डर बुक।

एक क्रिप्टो एक्सचेंज केवल तकनीकों से कहीं अधिक है। इसमें कई भाग और विभिन्न पहलू शामिल हैं जिन्हें प्रत्येक व्यवसाय के मालिक को इस प्रकार के संचालन यानी कानूनी, विपणन, बिक्री, संचालन, वित्त, तरलता और प्रौद्योगिकी के साथ शुरू करते समय ध्यान में रखना चाहिए।

FX.co ★ GBP/USD: 12 सितंबर को अमेरिकी व्यापार की योजना। GBP लगभग 17 अंक पर पहुंच गया

GBP/USD: 12 सितंबर को अमेरिकी व्यापार की योजना। GBP लगभग 17 अंक पर पहुंच गया

इससे पहले, मैंने आपको बाजार में कब प्रवेश करना है, यह तय करने के लिए 1.1690 के स्तर पर ध्यान देने के लिए कहा था। आइए 5 मिनट के चार्ट पर एक नजर डालते हैं कि क्या हुआ। पाउंड स्टर्लिंग 1.1642 टूट गया और नीचे की ओर परीक्षण करने में विफल रहा। उसके बाद, मुद्रा 1.1690 के अगले प्रतिरोध स्तर तक बढ़ती रही। इस स्तर के झूठे ब्रेकआउट ने एक सही बिक्री संकेत दिया। लेख लिखे जाने तक, युग्म में 25 पिप्स से अधिक की गिरावट आ चुकी थी। दिन के दूसरे भाग के लिए तकनीकी तस्वीर और व्यापारिक रणनीतियों को संशोधित किया गया।

GBP/USD: 12 सितंबर को अमेरिकी व्यापार की योजना। GBP लगभग 17 अंक पर पहुंच गया

GBP/USD पर लॉन्ग पोजीशन खोलने की शर्तें:

पाउंड स्टर्लिंग के खरीदारों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड से आक्रामक उपायों की उम्मीद में, सांख्यिकीय रिपोर्टों को नजरअंदाज कर दिया और लंबी स्थिति खोलना जारी रखा। यदि नियामक बेंचमार्क दर बढ़ाता है, तो फेड और BoE की ब्याज दरों के बीच का अंतर और भी कम हो जाएगा। दिन के दूसरे भाग में कोई व्यापक आर्थिक रिपोर्ट नहीं होगी जो बाजार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अमेरिकी व्यापार के दौरान पाउंड स्टर्लिंग में गिरावट आ सकती है। अगर इसमें गिरावट आती है तो व्यापारियों को 1.1656 के सपोर्ट लेवल पर ध्यान देना चाहिए। ट्रेडर्स इस लेवल से लॉन्ग ब्रेकआउट के बाद ही जा सकते हैं। यदि यह भविष्यवाणी सच होती है, तो युग्म 1.1694 के साप्ताहिक उच्च स्तर पर लौटने के लिए ऊपर उठना जारी रख सकता है। यदि कीमत इस स्तर को तोड़ती है और नीचे की ओर इसका परीक्षण करती है, तो खरीदार अधिक आश्वस्त हो जाएंगे और कीमत को 1.1724 तक बढ़ा सकते हैं। अगला लक्ष्य 1.1757 पर स्थित है, जहां मुनाफे में ताला लगाने की सिफारिश की जाती है। यदि युग्म में गिरावट आती है और खरीदार 1.1656 की रक्षा करने में विफल रहते हैं, तो युग्म पर दबाव बढ़ जाएगा। 1.1656 के नीचे, 1.1619 का केवल एक स्तर है, जहां चलती औसत हैं। वहां, व्यापारी झूठे ब्रेकआउट के बाद भी लंबे समय तक जा सकते हैं। 1.1581 या उससे भी कम के उछाल के बाद खरीद आदेश शुरू करना भी संभव है - 1.1551 से, 30-35 पिप्स के सुधार की उम्मीद है।

GBP/USD पर शॉर्ट पोजीशन खोलने की शर्तें:

GBP/USD: 12 सितंबर को अमेरिकी व्यापार की योजना। GBP लगभग 17 अंक पर पहुंच गया

हालांकि भालू 1.1645 की रक्षा करने में विफल रहे, उन्होंने 1.1645 पर अच्छा प्रदर्शन किया। जब तक कीमत इस स्तर से नीचे नहीं हो जाती, तब तक युग्म के पास गिरावट का पूरा मौका होगा। इस स्तर के झूठे ब्रेकआउट के बाद कम जाना बेहतर होगा। इस स्थिति में, युग्म 1.1656 के निकटतम समर्थन स्तर तक खिसक सकता है। 1.1656 का ब्रेकआउट और ऊपर की ओर परीक्षण 1.1619 पर लक्ष्य के साथ एक सही बिक्री संकेत देगा, जहां इसे मुनाफे में लॉक करने की सिफारिश की जाती है। अगला लक्ष्य 1.1581 पर है, जहां खरीदारों की चलती औसत है। यदि पाउंड/डॉलर की जोड़ी बढ़ती है और भालू 1.1694 की रक्षा करने में विफल रहते हैं, तो बैलों के पास कीमत को अधिक बढ़ाने का मौका होगा। इन शर्तों के तहत, 1.1724 के नए उच्च का केवल एक झूठा ब्रेकआउट एक बिक्री संकेत देगा। 1.1757 या उससे भी अधिक के रिबाउंड के बाद – 1.1793 से, दिन के भीतर 30-35 पिप्स की गिरावट की उम्मीद करते हुए बेचना भी संभव है।

GBP/USD: 12 सितंबर को अमेरिकी व्यापार की योजना। GBP लगभग 17 अंक पर पहुंच गया

According to the COT report from August 30, the number of short positions increased, whereas the number of long positions dropped. This fact proves that the pound sterling is at the peak of the long downtrend. Pressure on the pair is likely to remain intact since the UK economic situation is becoming worse, whereas GDP is rapidly dropping. The election of the new prime minister will have only a transient positive effect. The fact is that the overall state of affairs is the same. Meanwhile, the US economy remains strong. The recent data on the labor market points to the fact that the Fed will remain stuck to its aggressive stance. This, in turn, will intensify pressure on the British pound, which has faced numerous problems recently. Traders cannot open more and more long positions amid the expectations of higher inflation and the growing living standards crisis. The fact is that the UK is likely to publish a bulk of sluggish macroeconomic reports, which will push the pound sterling below the current levels. The recent COT report unveiled that the number of long non-commercial positions dropped by 306 to 58,477, whereas the number of short non-commercial positions increased by 898 to 86,647, thus causing a slight increase in the negative value of the non-commercial net position to -29,170 against -27,966. The weekly closing price collapsed to 1.1661 from 1.1822.सीओटी रिपोर्ट

30 अगस्त से सीओटी की रिपोर्ट के मुताबिक शॉर्ट पोजीशन की संख्या बढ़ी, जबकि लॉन्ग पोजीशन की संख्या घटी। यह तथ्य साबित करता है कि पाउंड स्टर्लिंग लंबी गिरावट के चरम पर है। युग्म पर दबाव बरकरार रहने की संभावना है क्योंकि यूके की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है, जबकि जीडीपी तेजी से गिर रही है। नए प्रधान मंत्री के चुनाव का केवल क्षणिक सकारात्मक प्रभाव होगा। तथ्य यह है कि समग्र स्थिति समान है। इस बीच, अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। श्रम बाजार के हालिया आंकड़े इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि फेड अपने आक्रामक रुख पर कायम रहेगा। यह बदले में, ब्रिटिश पाउंड पर दबाव बढ़ाएगा, जिसे हाल ही में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उच्च मुद्रास्फीति की उम्मीदों और बढ़ते जीवन स्तर के संकट के बीच व्यापारी अधिक से अधिक लंबी स्थिति नहीं खोल सकते हैं। तथ्य यह है कि यूके द्वारा बड़ी संख्या में सुस्त मैक्रोइकॉनॉमिक रिपोर्ट प्रकाशित करने की संभावना है, जो पाउंड स्टर्लिंग को मौजूदा स्तरों से नीचे धकेल देगी। हाल ही में सीओटी रिपोर्ट ने खुलासा किया कि लंबी गैर-व्यावसायिक पदों की संख्या 306 से घटकर 58,477 हो गई, जबकि लघु गैर-वाणिज्यिक पदों की संख्या 898 से बढ़कर 86,647 हो गई, जिससे गैर-व्यावसायिक नेट के नकारात्मक मूल्य में मामूली वृद्धि हुई। -27,966 के मुकाबले -29,170 की स्थिति। साप्ताहिक समापन मूल्य 1.1822.analytics631f088d1e920 से गिरकर 1.1661 पर आ गया। संकेतक के संकेत:

ट्रेडिंग 30- और 50-दिवसीय चलती औसत से ऊपर की जाती है, जो अपट्रेंड की ओर इशारा करती है।

नोट: चलती औसत की अवधि और कीमतों पर लेखक द्वारा एक घंटे के चार्ट पर विचार किया जाता है, जो दैनिक चार्ट पर क्लासिक दैनिक चलती औसत की सामान्य परिभाषा से भिन्न होता है।

यदि युग्म घटता है, तो समर्थन स्तर 1.1619 के निकट सूचक की मध्य रेखा पर स्थित होगा।

मूविंग एवरेज (मूविंग एवरेज, अस्थिरता और शोर को सुचारू करके वर्तमान प्रवृत्ति को निर्धारित करता है)। अवधि 50 है। इसे चार्ट क्या वायदा शेयर बाजार की भविष्यवाणी करता है पर पीले रंग में चिह्नित किया गया है।

मूविंग एवरेज (मूविंग एवरेज, अस्थिरता और शोर को सुचारू करके वर्तमान प्रवृत्ति को निर्धारित करता है)। अवधि 30 है। इसे ग्राफ पर हरे रंग में चिह्नित किया गया है।

एमएसीडी इंडिकेटर (मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस/डाइवर्जेंस - मूविंग एवरेज का कन्वर्जेंस/डाइवर्जेंस)। एक तेज ईएमए अवधि 12 है। धीमी ईएमए अवधि 26 है। एसएमए अवधि 9 है।

बोलिंगर बैंड। अवधि 20 है।

गैर-लाभकारी सट्टा व्यापारी व्यक्तिगत व्यापारी, हेज फंड और बड़े संस्थान हैं जो सट्टा उद्देश्यों के लिए वायदा बाजार का उपयोग करते हैं और कुछ आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

लॉन्ग नॉन-कमर्शियल पोजीशन गैर-व्यावसायिक व्यापारियों द्वारा खोले गए लॉन्ग पोजीशन की कुल संख्या है।

शॉर्ट नॉन-कमर्शियल पोजीशन गैर-व्यावसायिक व्यापारियों द्वारा खोले गए शॉर्ट पोजीशन की कुल संख्या है।

कुल गैर-व्यावसायिक शुद्ध स्थिति गैर-व्यावसायिक व्यापारियों द्वारा खोले गए शॉर्ट और लॉन्ग पोजीशन की संख्या में अंतर है।

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